बाघिन की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई

मुंबई के संजय गांधी पार्क में 18 साल की बिजली बाघिन की मौत, 2016 से बढ़ा रहीं थी पार्क की रौनक

Bijlee Tigress Dies Mumbai: मुंबई के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (SGNP) में 18 वर्षीय बाघिन बिजली का निधन हो गया है। वर्ष 2016 से पार्क का मुख्य आकर्षण रही बिजली के बारे में पूरी खबर पढ़ें।

गोरक्ष पोफली

Sanjay Gandhi National Park Tigress Dies: मुंबई के बोरीवली स्थित संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में आने वाले पर्यटकों के लिए एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। पार्क की सबसे लोकप्रिय और राजसी पहचान मानी जाने वाली 18 वर्षीय वाघिन 'बिजली' (T2) का उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण निधन हो गया है।

लगभग 18 साल और 4 महीने की उम्र पूरी कर चुकी इस वाघिन ने बुधवार रात करीब 9:45 बजे अंतिम सांस ली। बिजली के जाने से न केवल SGNP का वन्यजीव परिसर शोक में डूब गया है, बल्कि सालों से उसकी सेवा में जुटे देखभालकर्ताओं और लाखों वन्यजीव प्रेमियों की आंखें भी नम हो गई हैं।

पेंच से मुंबई तक का यादगार सफर

बिजली को 11 जुलाई 2016 को नागपुर के पास स्थित पेंच टाइगर रिजर्व से मुंबई के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में लाया गया था। इसके बाद से वह पिछले 10 से अधिक वर्षों से SGNP प्रशासन की देखरेख में रह रही थी।

अपने शांत स्वभाव, भव्य रूप और शानदार चाल-ढाल के कारण वह उद्यान में आने वालों के लिए हमेशा से कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनी रही। अपने इस लंबे प्रवास के दौरान उसने लाखों पर्यटकों को अपने दर्शन दिए और लोगों के बीच वन्यजीव संरक्षण तथा जागरूकता फैलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मृत बाघिन की फोटो

अंतिम दिनों का संघर्ष और चिकित्सकीय प्रयास

उद्यान प्रशासन के अनुसार, पिछले एक महीने से बिजली की खुराक और खान-पान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी। उसकी ढलती उम्र और गिरती सेहत को देखते हुए पशुचिकित्सकों की टीम उस पर चौबीसों घंटे निगरानी रख रही थी। उसे पश्चिम महाराष्ट्र की तकनीकी पशुचिकित्सा सलाहकार समिति के मार्गदर्शन में आवश्यक दवाएं, उपचार और सहायक देखभाल प्रदान की जा रही थी।

डॉक्टरों और देखभालकर्ताओं के तमाम प्रयासों के बावजूद बढ़ती उम्र की जटिलताओं के कारण उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका और उसने दम तोड़ दिया। आधिकारिक तौर पर मौत के सटीक कारण का पता लगाने के लिए नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

SGNP परिवार का भावुक लगाव और श्रद्धांजलि

बिजली केवल एक संरक्षित वन्यजीव नहीं थी, बल्कि SGNP के कर्मचारियों, डॉक्टरों और उसके केयरटेकरों के लिए परिवार की एक प्रिय सदस्य बन चुकी थी। सालों तक उसकी देखभाल करने वाले कर्मचारियों के लिए उसकी अनुपस्थिति एक गहरी व्यक्तिगत क्षति है। बिजली के चले जाने से अब संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की कुल संख्या घटकर 11 रह गई है।

पार्क प्रशासन ने उसके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए वन्यजीव संरक्षण में उसके योगदान को भावपूर्ण आदरांजलि अर्पित की है। इसके साथ ही प्रशासन ने आम जनता और वन्यजीव प्रेमियों से अपील की है कि वे बिजली के साथ बिताई गई अपनी यादों और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा कर उसे श्रद्धांजलि दें।

एक स्वर्णिम अध्याय का अंत

बिजली की विदाई के साथ बोरीवली नेशनल पार्क के इतिहास का एक स्वर्णिम और यादगार अध्याय समाप्त हो गया है। अब जब भी लोग SGNP की जंगल सफारी पर निकलेंगे, तो उन्हें बिजली की वह राजसी झलक देखने को नहीं मिलेगी। लेकिन वन्यजीव संरक्षण के संदेश और लाखों लोगों के दिलों में उसकी यादें हमेशा जीवंत रहेंगी।

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