Mumbai BEST CNG Bus Demand: बसों की कमी, कर्मचारियों की घटती संख्या और 2,296 करोड़ रुपए की देनदारी से जूझ रहे बेस्ट उपक्रम की इलेक्ट्रिक बसों को प्राथमिकता देने की नीति पर सवाल उठने लगे हैं।
आपली बेस्ट आपल्याचसाठी संस्था के अध्यक्ष रुपेश शेलटकर ने कहा कि करीब 3,000 बसों के सीमित बेड़े के चलते यात्रियों को लंबी फ्रीक्वेंसी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में महंगी इलेक्ट्रिक बसों के बजाय तत्काल सीएनजी बसें बढ़ाकर यात्री सेवा सुधारने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मीडिया से बातचीत करते हुए रुपेश शेलटकर ने कहा कि बेस्ट के पास पहले करीब 4,500 बसें थीं, जो अब घटकर करीब 3,000 रह गई हैं। इनमें करीब 2,700 इलेक्ट्रिक बसें हैं, जबकि स्वामित्व वाली बसों की संख्या केवल 249 बताई जा रही है।
इनमें टाटा की 25 हाइब्रिड बसें धारावी डिपो में स्पेयर पार्ट्स के अभाव में करीब दो साल से बंद हैं। बसों की कमी के कारण कई मार्गों पर बसों की फ्रीक्वेंसी एक से डेढ़ घंटे तक पहुंचने का दावा किया गया है।
बेस्ट बस पर करीब 2,296 करोड़ रुपए की देनदारी है। वर्ष 2025-26 में उपक्रम को करीब 1,805 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। आर्थिक संकट के बीच बीएमसी की मदद पर निर्भरता बढ़ी है। वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए बीएमसी ने बेस्ट के लिए 1,000-1,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की करीब 1,751 करोड़ रुपए की लंबित देनदारियां भी है। वेतन देने के लिए भी कर्ज लेने की स्थिति सामने आई है, पिछले दस वर्षों में नई भर्ती नहीं होने से बेस्ट का कर्मचारी बल घटकर करीब 40 प्रतिशत रह गया है।
नई बसें खरीदने, कर्मचारियों की भर्ती और अन्य दायित्वों के लिए करीब 6,000 करोड़ रुपए की जरूरत बताई गई है। बेस्ट के 22 डिपो के पुनर्विकास की योजना को समिति और मुंबई बीएमसी स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है।
शेलटकर ने कहा कि 2021 में ओलेक्ट्रा को 2,000 बसों का ठेका दिया गया था, लेकिन अब तक 687 बसों की डिलीवरी हुई है। इसके बावजूद कंपनी को 2,400 और बसों का ठेका दिया गया। पहले ठेके में 45 रुपए प्रति किलोमीटर की दर थी।