Rupali Chakankar (Image- Social Media) 
मुंबई

अशोक खरात केस: नाशिक SIT जांच से दूरी क्यों? खरात मामले में चाकणकर और गोरहे पर उठे सवाल

Rupali Chakankar Summons Controversy: अशोक खरात मामले में SIT जांच को लेकर सियासत गरमा गई है। रूपाली चाकणकर ने नाशिक में पेश होने से इनकार कर दिया है।

अपूर्वा नायक

Ashok Kharat Case Rupali Chakankar: ढोंगी बाबा अशोक खरात मामले में राकां (एपी) की नेता और राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने एसआईटी को चकमा दे दिया है।

एसआईटी ने उन्हें समन जारी किया था लेकिन उन्होंने सोमवार को जांच के लिए पेश होने से यह कहते हुए मना कर दिया कि वह महिला हैं और नाशिक पहुंचने में देरी होगी।

उनका नाशिक पहुंच पाना संभव नहीं है। चाकणकर के इस तरह की अजीबोगरीब वजह बताने से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। खरात से मिलने चाकणकर कई बार नाशिक जाती रही हैं।

हालांकि नाशिक की पुलिस अकादमी में चल रही एसआईटी जांच में पेश होने से उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नाशिक आने-जाने में समय बर्बाद होगा। जांच पुणे या मुंबई में हो। खरात केस में अब उनकी भूमिका को लेकर रहस्य गहराता जा रहा है।

इन मामलों में होनी है पूछताछ

एसआईटी चाकणकर से कई सवाल पूछने की तैयारी में है। क्या चाकणकर ने राज्य महिला आयोग के पद पर रहते हुए खरात को फायदे पहुंचाए? क्या खरात की चल-अचल संपत्ति से उनका कनेक्शन है? क्या उन्होंने शिवानिका ट्रस्ट को मदद की है? क्या वह सीए ललित पोफले के संपर्क में थीं? क्या उन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से वर्तमान और पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों के काले धन को सफेद करने में मदद की? क्या उन्होंने खरात के संपर्क में रहने वाली पीड़ित महिलाओं को प्रभावित किया?

मैं हर जांच के लिए तैयार : गोरहे

विप उपसभापति नीलम गोरहे का नाम भी इस मामले में उछला है। सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने उन पर खरात से मिलने का आरोप लगाया है। हालांकि देसाई के आरोपों को गोरहे ने खारिज कर दिया, उन्होंने कहा कि उनका पाखंडी बाबा खरात से कोई लेना-देना नहीं है।

मैं संवैधानिक पद पर कार्यरत हूं और मेरी जवाबदेही है। मैं किसी पाखंडी से नहीं मिलना चाहती, जो खुद को गुरु का अवतार बताता है। देसाई के आरोप गलत है। उन्हें सबूत देना चाहिए, मैं हर जांच के लिए तैयार हूं।

खरात भक्त गोरहे की हो जांच

इससे पहले भूमाता ब्रिगेड की तृप्ति देसाई ने दावा किया था कि गोरहे विप की सदस्यता पाने के लिए पिछले 6 साल से खरात के पास जाती थी। खरात की भक्त्त गौरहे की जांच होनी चाहिए। वह नाशिक के एक्सप्रेस इन होटल में खरात से मिली थीं। गोरहे कई सामाजिक और महिलाओं के मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाती रही हैं। हालांकि खरात मामले पर वह पूरी तरह चुप हैं। इससे उनकी भूमिका पर संदेह निर्माण हो रहा है।

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