Andheri MIDC Footpath Encroachment: मायानगरी मुंबई का अंधेरी इलाका, जो अपनी व्यावसायिक गतिविधियों और भारी ट्रैफिक के लिए जाना जाता है, इन दिनों एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाली समस्या से जूझ रहा है। अंधेरी के MIDC रोड पर पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए फूटपाथ अब पूरी तरह से गायब हो चुके हैं।
सोशल मीडिया पर इस इलाके का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देख लोग शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठा रहे हैं।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अंधेरी MIDC रोड पर फूटपाथों का नामोनिशान मिट गया है। इसका कारण कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि अवैध दुकानों और अस्थायी ठेलों का बढ़ता अतिक्रमण है। सड़क के किनारे पैदल चलने के लिए बनी जगह पर अवैध रूप से दुकानें और टपरियां सज गई हैं, जिससे फूटपाथ लगभग अदृश्य हो गए हैं। आलम यह है कि चाय, सिगरेट और अन्य सामान बेचने वाले इन अवैध स्टालों ने पूरे फुटपाथ को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
फूटपाथों के गायब होने का सबसे बुरा असर आम जनता और दफ्तर जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। चूंकि फूटपाथों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है, इसलिए पैदल यात्रियों के पास व्यस्त और भारी ट्रैफिक वाली सड़क पर चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच सड़क पर चलना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। यह स्थिति न केवल पैदल यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है, बल्कि इलाके की बदहाल बुनियादी ढांचे की पोल भी खोलती है।
वायरल वीडियो पर नेटिज़न्स अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह का अतिक्रमण कैसे फल-फूल रहा है? एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, क्या ये फूटपाथ आम आदमी के चलने के लिए बनाए गए थे या चाय-सिगरेट बेचने के लिए? लोग इस बात से भी नाराज हैं कि टैक्स देने के बावजूद उन्हें सुरक्षित चलने की जगह तक नहीं मिल पा रही है।
अंधेरी MIDC जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में फूटपाथों पर अतिक्रमण होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है। अवैध अस्थायी ढांचों ने पूरे रास्ते को घेर लिया है, लेकिन इन्हें हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों की मांग है कि इन अवैध अतिक्रमणों को तुरंत हटाया जाए और फूटपाथों को फिर से पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित बनाया जाए, इससे पहले कि कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए।
अंधेरी की यह स्थिति मुंबई के अन्य हिस्सों के लिए भी एक चेतावनी है, जहां पैदल यात्रियों के अधिकारों को ताक पर रखकर सड़कों और फूटपाथों का व्यवसायीकरण किया जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गायब हुए फूटपाथ को वापस ढूंढ पाता है या नहीं।