व्हाइट कॉलर लेऑफ़ (सौ. AI Generated Image) 
मुंबई

AI के कारण व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों पर मंडरा रहा खतरा, 2030 तक 18 मिलियन नौकरियां होगी प्रभावित

AI Job Cuts: दुनियाभर की टेक कंपनियों में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से नौकरियों पर खतरा गहराने लगा है। आने वाले वर्षों में भारत में लाखों व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों को छंटनी का सामना करना पड़ सकता है।

अपूर्वा नायक

AI Job Cuts India 2026: दुनिया की तमाम बड़ी टेक कंपनियों समेत भारतीय कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के चलते हो रही छंटनियों को विशेषज्ञ शुरुआती असर बता रहे हैं। उनका मानना है छंटनी का असर बड़े पदों तक देखने को मिलेगा।

भारत में 58% ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पहले से ही संख्या बल को लेकर एआई में निवेश कर रहे हैं, जबकि 80% से अधिक उत्पादन के स्तर पर एआई में निवेश कर रहे हैं।

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभमुखर्जी अनुसार, भारत में व्हाइट-कॉलर कार्यबल को भी संभावित रूप से भारी छंटनी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि एआई तेजी से प्रयोग से क्रियान्वयन की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि कंपनियों द्वारा मनुष्यों द्वारा किए जाने वाले कार्यों को स्वचालित करने की होड़ में लाखों नौकरियां गायब हो सकती हैं।

उन्होंने अमेरिकी सॉफ्टवेयर दिग्गज सर्विसनाठ की एक रिपोर्ट से जुड़े अनुमानों की ओर इशारा किया, जिसमें सुझाव दिया गया है कि 2030 तक एआई ऑटोमेशन से 18 मिलियन भारतीय नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जबकि उनके स्थान पर केवल लगभग 3 मिलियन नई तकनीकी नौकरियां मिलेंगी।

इस तरह 1.5 करोड़ नौकरियों पर संकट आने वाला है। इनमें से कई भूमिकाओं को पूरी तरह से समाप्त करने के बजाय एआई द्वारा नई भूमिका में प्रस्तुत किया गया है। मुखर्जी ने कहा कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वर्तमान में हो रही छंटनी केवल इस बात की शुरुआती झलक है कि जब एआई सिस्टम मानवीय स्तर पर डिजिटल कार्य करने में सक्षम हो जाएंगे।

कंपनियां कर रहीं भारी निवेश

उन्होंने कहा, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, अल्फाबेट, एप्पल और एग्रोपिक सहित हाइपरस्केलर्स द्वारा प आई पर किए जा रहे भयानक खर्च से इस बदलाव को बढ़ावा मिल रहा है। इन कंपनियों ने पिछले 12 महीनों में ही एआई पूंजीगत व्यय को सामूहिक रूप से दोगुना कर दिया है और एआई बुनियादी ढांचे, चिप्स, डेटा केंद्रों और बड़े भाषा मॉडल प्रशिक्षण में लगभग 800 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। यह भारतीय जीडीपी का 25% है। मुझे लगता है कि निर्णायक मोड़ आ गया है।

30 गुना बढ़ गई आय

मुखर्जी ने एक उदाहरण देते हुए दावा किया कि एंथ्रोपिक के क्लाउड एआई प्लेटफॉर्म से जुड़ा औद्योगिक राजस्व 2025 की शुरुआत में लगभग 1 बिलियन डॉलर से बढ़कर मात्र 15 महीनों के भीतर वार्षिक रूप से लगभग 30 बिलियन डॉलर हो गया। उन्होंने कहा, यहीं तो पैमाने की अर्थव्यवस्था है। यही तो उड़ान है। यही तो निर्णायक मोड़ है।

बिग टेक का महा निवेश

माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा व अमेजन इस साल एआई इनका पर रिकॉर्ड 69 लाख करोड़ रु खर्च कर रहे हैं। गार्टनर के अनुसार, वैश्विक एआई खर्च 240 लाख करोड़ रु हो जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट का एआई बिजनेस 3.53 लाख करोड के अनुमानित लाभ पर है।

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