ईस्ट इंडिया कंपनी से तुलना कर निवेशक ने भारतीय अमीरों को घेरा, स्टार्टअप फंडिंग पर उठाए सवाल

India Rich Investors Risk: वेंचर कैपिटलिस्ट शंकर ने भारत के अमीर निवेशकों की जोखिम लेने से सवाल उठाए हैं। उन्होेंने कहा है कि सोने में बंद पूंजी देश के स्टार्टअप विकास की रफ्तार धीमी कर रही है।
India Rich Investors Risk Capital News
इंडिया स्टार्टअप फंडिंग क्राइसिस (सौ. AI Image)
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India Rich Investors Risk Capital News: ईस्ट इंडिया कंपनी भारत इसलिए आ सकी थी, क्योंकि लंदन के निवेशकों का समूह एक अज्ञात भविष्य पर बड़ा और अप्रत्याशित जोखिम लेने के लिए तैयार था। लेकिन, भारत के सबसे अमीर और सबसे बड़े व्यापारिक घराने आज भी रिस्क लेने से बच रहे हैं।

उन्होंने अपना पैसा रियल एस्टेट और सोने के रूप में सुरक्षित कर रखा है। टॉप के 1% अमीरों की यही सोच देश के इनोवेशन और आरएंडडी विकास में बाधा बन रही है। ये लोग इनोवेशन इकोनॉमी (नवाचार अर्थव्यवस्था) को जोखिम पूंजी (रिस्क कैपिटल) से वंचित कर रहे हैं।

वेंचर कैपिटलिस्ट शंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह सवाल उठाए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि भारत के पास पूंजी की कमी नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि भारतीय पूंजीपति साहस के साथ पूंजी लगाने से कतराता है।

भारत के सबसे अमीर 1% लोग अपनी कुल संपत्ति का लगभग 60% हिस्सा रियल एस्टेट और सोने में रखते हैं। उन्होंने उन खरबों रुपयों की ओर इशारा किया जो अपार्टमेंट्स, भौतिक संपत्तियों और आभूषणों में बंद पड़े हैं।

कंपनी भारतीय, मालिक विदेशी भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम डिफेंस टेक्नोलॉजी (रक्षा तकनीक), एयरोस्पेस, क्लाइमेट टेक, ऑटोनॉमस सिस्टम्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में कंपनियां बनाने वाले महत्वाकांक्षी संस्थापकों को लगातार तैयार कर रहा है। लेकिन, इन कंपनियों को सहारा देने वाला अधिकांश पैसा अभी भी विदेशी निवेशकों से आता है। "रॉकेट भारत बना रहा है, लेकिन उसकी इक्विटी (स्वामित्व) का मालिक कोई और बन रहा है।"

ईस्ट इंडिया कंपनी से तुलना

शंकर ने लिखा कि सन 1600 में, अंग्रेज व्यापारियों ने हजारों मील दूर एक अज्ञात बाजार को लक्षित करके एक उच्च जोखिम वाले उद्यम में पैसा इकट्टा किया था। इसकी कोई गारंटी नहीं थी, कोई स्थापित बिजनेस मॉडल नहीं था और यह भी निश्चित नहीं था कि जहाज वापस लौटेंगे या नहीं। सग्रेजों ने सोना खरीदकर और उसे बिस्तर के नीचे रखकर साम्राज्य नहीं बनाया था। उन्होंने अज्ञात क्षेत्रों में अभियानों को फंड देकर इसे खड़ा किया था।"

यह बेहद विनाशकारी

शंकर के अनुसार उपनिवेश (गुलाम) रहे लोगों के वंशजों ने अब पूंजी के साथ एक ऐसा रिश्ता अपना लिया है जो बेहद जोखिम से डरने वाला, सामंती और शोषक है। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय संस्थापकों को फंड देने के बजाय, अमीर परिवार दूसरे फ्लैट और तीसरे फ्लैट में पैसा डालना जारी रख रहे हैं, जबकि विदेशी निवेशक भारत की स्टार्टअप क्रांति के मुनाफे पर कब्जा कर रहे है।

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