आदित्य ठाकरे का बयान (सोर्स: डिजाइन फोटो) 
मुंबई

'हमें न्याय की अपेक्षा है...', ओम बिरला से मुलाकात के बाद बोले आदित्य ठाकरे, ऑपरेशन टायगर से मची खलबली

Aditya Thackeray Om Birla Meeting: लोकसभा में शिवसेना ठाकरे गुट के 6 सांसदों के पाला बदलने के बाद आदित्य ठाकरे ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और कहा कि हमें न्याय की उम्मीद है।

गोरक्ष पोफली

Aditya Thackeray Meets Om Birla: महाराष्ट्र की राजनीति में जारी घमासान अब दिल्ली की दहलीज तक पहुंच गया है। शिवसेना ठाकरे गुट के भीतर लोकसभा में हुई बड़ी टूट के बाद, पार्टी नेता आदित्य ठाकरे ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उन्हें न्याय की अपेक्षा है। यह बयान उस समय आया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना ठाकरे गुट के सांसदों को एक महत्वपूर्ण बैठक के लिए बुलाया, जिससे राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

शिवसेना ठाकरे गुट को लोकसभा में उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके छह सांसदों ने औपचारिक रूप से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम को ऑपरेशन टाइगर का नाम दिया गया है। बागी होने वाले सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबाळकर, संजय दिना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापूराव पाटिल अष्टीकर शामिल हैं।

स्पीकर के सामने पक्ष रखने की तैयारी

बुधवार शाम 5 बजे निर्धारित इस बैठक में शिवसेना ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। पार्टी की मुख्य मांग यह है कि बागी गुट के सांसदों को आधिकारिक मान्यता न दी जाए। इस दौरान आदित्य ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में उचित न्याय होगा। वहीं, सांसद संजय राउत ने भी हमलावर रुख अपनाते हुए इसे महाराष्ट्र के गद्दारों के खिलाफ लड़ाई करार दिया है।

मुंबई की बदहाली पर बीजेपी को घेरा

दिल्ली में सियासी खींचतान के बीच, आदित्य ठाकरे ने मुंबई में मानसून की पहली बारिश के बाद पैदा हुए हालात पर भी भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार नागरिकों के बजाय केवल ठेकेदारों और बिल्डरों के हित देख रही है।

मेयर रितु तावडे के निरीक्षण दौरे पर तंज कसते हुए आदित्य ने कहा कि मुंबई की मेयर को मुंबई से ज्यादा ढाका की चिंता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहली ही बारिश में मुंबई पानी-पानी हो गई क्योंकि प्रशासन का ध्यान शहर की बुनियादी समस्याओं पर नहीं था। इसके साथ ही, उन्होंने केईएम अस्पताल के नाम बदलने के प्रस्ताव और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दों पर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

फिलहाल, सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं कि वे शिवसेना के इस नए शक्ति संतुलन को किस तरह देखते हैं।

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