जब बैल की पीठ पर सवार होकर तहसील कार्यालय पहुंचा किसान! अनोखे विरोध का यह VIDEO देख चौंक गए नेटिजेन्स

Farmer Unique Protest: चंद्रपुर में कर्जमाफी और प्रशासन की बेरुखी से परेशान एक किसान अनोखे विरोध प्रदर्शन के लिए सीधे बैल पर सवार होकर तहसील कार्यालय पहुंच गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
farmer rides bull to tehsil office chandrapur protest viral video
बैल पर सवार किसान (सोर्स: सोशल मीडिया)
Updated on

Farmer Rides Bull To Tehsil Office: महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल प्रशासन को झकझोर दिया है, बल्कि हर संवेदनशील इंसान के दिल को भी कचोट दिया है। राजुरा तहसील के गोएगांव के रहने वाले किसान दिवाकर हिरामन पहनपाटे ने अपनी व्यथा सुनाने के लिए जो रास्ता चुना, वह जितना अनोखा था, उतना ही दर्दनाक भी। यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक किसान के उस गहरे मानसिक संघर्ष की चीख थी, जो कर्ज के बोझ और मानसून की बेरुखी के बीच अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

कल्पना कीजिए उस किसान की, जिसके लिए उसका बैल महज एक जानवर नहीं, बल्कि उसका दाहिना हाथ, उसका परिवार और उसकी आजीविका का सबसे बड़ा सहारा होता है। जब एक किसान उसी सहारे पर बैठकर, उसे तहसील कार्यालय की सीढ़ियों के पार सीधे तहसीलदार के दरवाजे तक ले जाता है, तो उसके मन में क्या उथल-पुथल मची होगी? दिवाकर हिरामन पहनपाटे कर्ज के भारी बोझ तले दबे हुए हैं और इस साल मानसून की देरी ने उनकी बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। 'कर्जमाफी होनी ही चाहिए' का नारा लगाते हुए जब वे बैल पर सवार होकर कार्यालय में घुसे, तो वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया।

बैल: संघर्ष और बदहाली का प्रतीक

आमतौर पर किसान अपनी मांगों के लिए धरना देते हैं या ज्ञापन सौंपते हैं, लेकिन दिवाकर ने कृषि व्यवस्था के सबसे बड़े प्रतीक, 'बैल' को ही अपनी व्यथा का माध्यम बनाया। यह इस बात का संकेत है कि जब जमीन सूख रही हो और बैंक के कर्ज के नोटिस दरवाजे पर दस्तक दे रहे हों, तो किसान के पास अपने इस मूक साथी के अलावा कोई और चारा नहीं बचता। बैल पर बैठकर तहसील कार्यालय पहुंचना प्रशासन पर सीधा कटाक्ष था कि जिसकी बदौलत पूरी दुनिया का पेट भरता है, आज वही अन्नदाता अपने सबसे प्रिय साथी के साथ दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।

सोशल मीडिया पर उमड़ा दर्द

इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जहां एक ओर लोग किसान के इस अनोखे तरीके की प्रशंसा कर रहे हैं और उसकी हिम्मत की दाद दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नेटिजन्स इस बात पर हताश हैं कि आखिर देश के किसान को इस स्थिति तक क्यों आना पड़ा। वीडियो में किसान के चेहरे पर दिखने वाला रोष और बेबसी यह बताने के लिए काफी है कि उसकी मनस्थिति इस समय क्या रही होगी।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि महाराष्ट्र के चंद्रपुर और आसपास के क्षेत्रों में किसान किस कदर आर्थिक संकट और मौसम की मार झेल रहे हैं। दिवाकर का यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का गुस्सा नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों की आवाज है जो हर रोज खेती की बदहाली से जूझ रहे हैं। क्या प्रशासन इस मूक पुकार को सुनेगा, या यह वीडियो भी कुछ दिनों बाद इंटरनेट की दुनिया में कहीं खो जाएगा, यह एक बड़ा सवाल है।

Navbharat Live
navbharatlive.com