मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 की क्षमता घटाने पर विवाद।
265 साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें नवी मुंबई शिफ्ट करने की योजना।
एयरलाइंस ने केंद्र और नागरिक उड्डयन मंत्रालय से शिकायत की।
Mumbai Airport Capacity Cut: छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल-1 की यात्री क्षमता कम करने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को नवी मुंबई हवाईअड्डे पर स्थानांतरित करने की योजना को लेकर अदाणी समूह और विमानन कंपनियों के बीच विवाद बढ़ गया है। एयरलाइंस कंपनियों की प्रतिनिधि समिति ने मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एमआईएएल) के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए इसे एकतरफा और मनमाना फैसला बताया है। हवाईअड्डा ऑपरेटर की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के बाद विमानन कंपनियों ने अब केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है।
अदाणी समूह द्वारा संचालित हवाईअड्डा ऑपरेटर टर्मिनल-1 के पुनर्विकास की योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत निर्माण कार्य शुरू होने से पहले टर्मिनल की सालाना यात्री क्षमता में करीब 50 लाख की कटौती करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही लगभग 265 साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है।
इस प्रस्ताव को लेकर एयरलाइंस कंपनियों ने चिंता जताई है। उनका मानना है कि मौजूदा हवाईअड्डे की क्षमता और उपलब्ध सुविधाओं की पूरी जानकारी साझा किए बिना उड़ानों को स्थानांतरित करने का फैसला लिया जा रहा है।
एयरलाइंस ऑपरेटर्स कमेटी का आरोप है कि एमआईएएल ने मौजूदा हवाईअड्डे की वास्तविक उपलब्ध क्षमता का स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया है। समिति के अनुसार, क्षमता में कटौती और उड़ानों के स्थानांतरण से जुड़े प्रस्ताव पर विमानन कंपनियों के साथ पर्याप्त चर्चा भी नहीं हुई है।
विमानन कंपनियों ने ऑपरेटर से इस योजना का आधार और उसके संभावित प्रभाव स्पष्ट करने की मांग की थी। हालांकि, उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का दावा किया जा रहा है।
हवाईअड्डा ऑपरेटर के रुख से असंतुष्ट एयरलाइंस ने अब सीधे केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के समक्ष अपनी आपत्तियां रखी हैं। कंपनियां चाहती हैं कि टर्मिनल-1 की क्षमता घटाने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को नवी मुंबई स्थानांतरित करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा हो तथा उपलब्ध क्षमता और परिचालन संबंधी जानकारी पारदर्शी तरीके से साझा की जाए।
इस विवाद का समाधान आने वाले समय में मुंबई शहर और नवी मुंबई के हवाई यातायात के संचालन तथा दोनों हवाईअड्डों के बीच उड़ानों के बंटवारे को प्रभावित कर सकता है।