Accident Free Maharashtra Initiative: राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 'एक्सीडेंट फ्री महाराष्ट्र' मिशन की तैयारी शुरू कर दी है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक योजना तैयार की गई है, जिसके तहत राष्ट्रीय और राज्य महामार्गों सहित प्रमुख सड़कों पर रिफ्लेक्टर, सोलर आधारित संकेतक, दिशा सूचक चिह्न, आधुनिक चेतावनी प्रणाली और अन्य सुरक्षा सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव को अगले दो से तीन महीनों में अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद राज्यभर में चरणबद्ध तरीके से काम शुरू किया जाएगा। इस योजना में केंद्र सरकार की ओर से पर्याप्त फंड जारी किए जा रहे हैं।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर स्पीड कैमरों और सेंसरों के माध्यम से जारी किए जा रहे ई-चालानों को लेकर सामने आ रही शिकायतों पर महाराष्ट्र सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि एक्सप्रेसवे पर कुछ स्थानों पर दो से तीन किलोमीटर लंबा ढलान वाला क्षेत्र है। ऐसे हिस्सों में वाहन की गति स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है, जिसके कारण कई वाहन चालकों को चालान जारी होने की शिकायतें मिली हैं।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में बड़ी संख्या में नागरिकों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं और सरकार इन शिकायतों को गंभीरता से देख रही है। इन शिकायतों में तथ्य होने की बात स्वीकार करते हुए उन्होंने परिवहन आयुक्त और आरटीओ विभाग को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि जुर्माना वसूलने का उद्देश्य सरकारी राजस्व बढ़ाना नहीं है। दंड व्यवस्था का मकसद केवल यातायात अनुशासन कायम रखना और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी तकनीकी व्यवस्था या प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण आम नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है तो ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे केवल संबंधित विभागों को लाभ मिले और आम वाहन चालकों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़े।
मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि यूरोप, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे देशों में सड़क सुरक्षा के लिए जिन आधुनिक उपायों का उपयोग किया जाता है, उसी प्रकार की व्यवस्था महाराष्ट्र में भी विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी के साथ ही जहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, वहां सौर ऊर्जा से संचालित विशेष संकेतक, प्रकाशयुक्त बॉक्स और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण स्थापित किए जाएंगे, ताकि रात के समय वाहन चालकों को मार्ग स्पष्ट दिखाई दे और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो सके। राष्ट्रीय, राज्य महामार्गों और स्थानीय निकायों के अधीन प्रमुख सड़कों पर रिफ्लेक्टर, वैज्ञानिक ढंग से निर्मित स्पीड ब्रेकर, दिशा सूचक एरो मार्किंग, चेतावनी संकेतक और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाए जाएंगे।
इस दौरान राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं, विशेष रूप से बस दुर्घटनाओं को लेकर भी परिवहन मंत्री ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भले ही बेस्ट परिवहन सेवा सीधे उनके विभाग के अधीन नहीं आती, लेकिन एक परिवहन मंत्री के रूप में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है। सरकार का लक्ष्य दुर्घटनाओं की संख्या को कम करना है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर एक विशेष राज्यस्तरीय योजना तैयार कर रही है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार से भी बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। योजना का उद्देश्य महाराष्ट्र में सड़क सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू करना और दुर्घटनाओं की संभावना को कम करना है।
| सूचकांक | 2025 | 2026 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| कुल दुर्घटनाएं | 12,610 | 12,381 | -2% |
| प्राणघातक दुर्घटनाएं | 5,275 | 4,827 | -6% |
| मौतें | 5,681 | 5,233 | -6% |
| जिला | कमी |
|---|---|
| वाशिम | 31% |
| हिंगोली | 28% |
| गडचिरोली | 27% |
| यवतमाल | 24% |
| नवी मुंबई | 19% |
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| लक्ष्य | आंकड़ा |
|---|---|
| दुर्घटनाओं में कमी | 50% |
| रोड सेफ्टी सेल | राज्य व जिला स्तर |
| ब्लैक स्पॉट सुधार | डीपीडीसी योजना |
| बिंदु | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल दुर्घटनाएं घटीं | 2% |
| प्राणघातक हादसे घटे | 6% |
| मौतें घटीं | 6% |
| सबसे बेहतर जिला | वाशिम (31%) |