अरविंद केजरीवाल व उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

BMC चुनाव में बड़ा बवाल! उद्धव गुट के प्रत्याशी की उम्मीदवारी होगी रद्द? AAP ने चुनाव आयोग से की ये मांग

BMC Elections में वार्ड 97 से शिवसेना (यूबीटी) उम्मीदवार ममता चव्हाण के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज की है। आप ने नामांकन में संपत्ति की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया।

आकाश मसने

AAP Vs Shiv Sena UBT: मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के मद्देनजर वार्ड नंबर 97 में सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी ने उद्धव ठाकरे गुट की उम्मीदवार ममता चव्हाण चटांबली के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। 'आप' का दावा है कि ममता ने अपने शपथ पत्र में महत्वपूर्ण संपत्तियां छिपाई हैं।

आम आदमी पार्टी ने की अयोग्य घोषित करने की मांग मुंबई के वांद्रे-177 विधानसभा क्षेत्र में चुनावी हलचल उस वक्त बढ़ गई, जब आम आदमी पार्टी (AAP) ने उद्धव गुट (यूबीटी शिवसेना) की उम्मीदवार ममता चव्हाण चटांबली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। 'आप' के क्षेत्रीय अध्यक्ष अजय लालजी सिंह ने रिटर्निंग ऑफिसर प्रशांत ढागे को एक औपचारिक पत्र लिखकर मामले की तत्काल जांच करने का आग्रह किया है। शिकायत में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि चुनावी नियमों के उल्लंघन के आधार पर उम्मीदवार को तुरंत अयोग्य घोषित किया जाए।

संपत्ति और ट्रस्ट से जुड़ी जानकारी छिपाने का आरोप

शिकायत में ममता चव्हाण पर जानबूझकर अपनी चल और अचल संपत्तियों का पूरा विवरण न देने का गंभीर आरोप लगाया गया है। 'आप' के अनुसार, ममता के नाम पर या उनके साथ संयुक्त रूप से मौजूद कई संपत्तियों को चुनावी एफिडेविट में शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा, यह भी दावा किया गया है कि वे किसी ट्रस्ट से ट्रस्टी, मैनेजिंग ट्रस्टी या लाभार्थी के रूप में जुड़ी हुई हैं, लेकिन शपथ पत्र में इस जानकारी का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

आम आदमी पार्टी ने यह भी उजागर किया है कि ममता चव्हाण ने लीज पर ली गई संपत्तियों और उनसे होने वाली आय का खुलासा भी नहीं किया है, जबकि चुनावी कानून के तहत ऐसी सभी जानकारियों को साझा करना अनिवार्य है। 'आप' का मानना है कि यह कोई मामूली तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि मतदाताओं को गुमराह करने के उद्देश्य से की गई एक गंभीर और ठोस खामी है।

कानूनी नियमों का उल्लंघन और कोर्ट जाने की चेतावनी

अजय लालजी सिंह ने जोर देकर कहा है कि संपत्ति और आय की जानकारी छिपाना सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव आयोग इस मामले में समय पर और उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो वे न्याय के लिए अदालत का रुख करेंगे। उनका तर्क है कि इस तरह की पारदर्शिता की कमी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करती है।

इस स्थिति को एक पारदर्शी खिड़की के उदाहरण से समझा जा सकता है; यदि खिड़की पर जानबूझकर पर्दा डाल दिया जाए, तो बाहर खड़े व्यक्ति को अंदर की सही स्थिति नहीं दिखती। उसी तरह, चुनावी हलफनामा वह खिड़की है जिससे जनता उम्मीदवार की असलियत देखती है, और जानकारी छिपाना उस पारदर्शिता को खत्म करने जैसा है।

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