मंत्री बाबासाहेब पाटिल, लातूर जिला सहकारी बैंक सोर्स: सोशल मीडिया
लातूर

महाराष्ट्र के सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटिल को RBI का बड़ा झटका, लातूर सहकारी बैंक के संचालक पद से हटाया

Babasaheb Patil Remove Latur Bank Director Post: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महाराष्ट्र के सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटिल को लातूर जिला मध्यवर्ती बैंक के संचालक पद से हटा दिया है।

आकाश मसने

RBI Remove Babasaheb Patil From Latur Bank Director Post: महाराष्ट्र के सहकारिता क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटिल को लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई बैंक संचालक पद पर निर्धारित अवधि से अधिक समय तक बने रहने से जुड़े कड़े बैंकिंग नियमों के उल्लंघन के तहत की गई है। इस फैसले के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों और सहकारिता हलकों में हड़कंप मच गया है।

क्या है लातूर जिला सहकारी बैंक का पूरा मामला?

यह पूरा विवाद लातूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के 19 सदस्यीय संचालक मंडल से जुड़ा है। बैंक के सदस्य और अधिकृत मतदाता प्रतिनिधि सतीश शेषराव जाधव ने 25 मई को भारतीय रिजर्व बैंक से एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

अपनी शिकायत में जाधव ने आरोप लगाया था कि बैंक के मंत्री बाबासाहेब पाटिल समेत 8 संचालक पिछले 10 से अधिक वर्षों से लगातार अपने पदों पर बने हुए हैं, जो बैंकिंग नियमों के विपरीत है। शिकायतकर्ताओं ने इन सभी आठों सदस्यों की पात्रता पर गंभीर सवाल उठाए थे। इन आरोपी संचालकों की सूची में राज्य के सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटिल का नाम भी प्रमुखता से शामिल था।

बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई

सतीश शेषराव जाधव ने इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ का रुख किया था। 3 अगस्त 2026 को अदालत ने RBI को 25 मई की शिकायत पर गुण-दोष के आधार पर 6 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद 8 में से 7 संचालकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि बाबासाहेब पाटिल ने इस्तीफा नहीं दिया। इसके बाद आरबीआई ने कार्रवाई करते हुए उन्हें संचालक पद से हटा दिया है।

मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने RBI के फैसले को बताया गलत

आरबीआई की कार्रवाई पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता और मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष के कार्यकाल से संबंधित कानून उनके मामले में लागू नहीं होता। पाटिल के अनुसार, आरबीआई का निर्णय गलत और अनुचित है तथा वह संचालक के रूप में इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।

इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक और सहकारिता क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने अगस्त के आदेश में संचालकों की वास्तविक अयोग्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया था, उसने आरबीआई को शिकायत पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

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