लाभले आम्हास भाग्य बोलतो मराठी... (सौजन्य: सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

Marathi Bhasha Gaurav Din: 'लाभले आम्हास भाग्य बोलतो मराठी'...जानते है 'गौरव दिवस' और 'राजभाषा दिवस' के बीच का अंतर

मराठी भाषा में 40 से अधिक बोलियाँ भी शामिल हैं। मराठी भाषा गौरव दिवस और मराठी राजभाषा दिवस दो अलग-अलग दिन मनाए जाते हैं। इन दोनों दिनों में क्या अंतर है? आइए जानते हैं।

आंचल लोखंडे

Marathi Bhasha Gaurav Din:

'लाभले आम्हास भाग्य बोलतो मराठी,

जाहलो खरेच धन्य ऐकतो मराठी!'...

आज 'मराठी भाषा गौरव दिवस' है। इस साल का मराठी भाषा गौरव दिवस अधिक खास है। अपने आप में यह दिन गौरवशाली है। इसका कारण भी ऐसा ही खास है। इस साल मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा जो मिला है। हर मराठी और अमराठी मनुष्य का सीना गौरव से चौड़ा हो गया है।

27 फरवरी को महाराष्ट्र में मराठी भाषा गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। कविवर्य कुसुमाग्रज अर्थात वि. वा. शिरवाडकर की आज जयंती है। इस साल मराठी भाषा गौरव दिवस मनाने की खुशी दोगुनी है क्योंकि मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार के अनुरोध के बाद केंद्र सरकार ने अपनी मराठी भाषा को यह दर्जा दिया है।

83 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है मराठी

भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में से एक है मराठी और दुनिया भर में 83 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। मराठी भाषा में 40 से अधिक बोलियाँ भी शामिल हैं। मराठी भाषा गौरव दिवस और मराठी राजभाषा दिवस दो अलग-अलग दिन मनाए जाते हैं। इन दोनों दिनों में क्या अंतर है? आइए जानते हैं।

मराठी भाषा गौरव दिवस 27 फरवरी को ही क्यों मनाया जाता है?

ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता मराठी साहित्यकार वि. वा. शिरवाडकर अर्थात कुसुमाग्रज की जयंती के अवसर पर 27 फरवरी को मराठी भाषा गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य मराठी भाषा को बढ़ावा देना और महिमामंडन करना है। साथ ही कुसुमाग्रज की स्मृति भी प्रकाश में आती है।

कवि कुसुमाग्रज की जयंती

बता दें कि किसी कवि की जयंती पर मराठी भाषा सम्मान दिवस मनाने वाला महाराष्ट्र एकमात्र राज्य है। कुसुमाग्रज की जयंती पर मराठी भाषा गौरव दिवस मनाया जाता है क्योंकि इस भाषा में कुसुमाग्रज का योगदान बहुत बड़ा है। कुसुमाग्रज ने मराठी भाषा को ज्ञान की भाषा बनाने के लिए बहुत प्रयास किए। इसलिए उनकी जयंती के अवसर पर 27 फरवरी को मराठी भाषा गौरव दिवस मनाया जाता है। 2013 से 27 फरवरी को मराठी राजभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मराठी राजभाषा दिवस क्या है?

मराठी राजभाषा दिवस 1 मई को मनाया जाता है। इसके पीछे एक खास वजह है। मुंबई के साथ महाराष्ट्र का गठन 1 मई 1960 को किया गया था। इस दिन मराठी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई थी।

उसके बाद, वसंतराव नाइक सरकार ने एक प्रस्ताव रखा कि 1965 में 1 मई को मराठी राजभाषा दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। इस संबंध में अधिनियम 11 जनवरी, 1965 को प्रकाशित किया गया था। यह 1966 से लागू हुआ। तब से यानी 1 मई 1966 से पिछले 59 वर्षों से 1 मई को मराठी राजभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

'माझा मराठीचे बोलू कौतुके परी

अमृतातेही पैजासी जिंके,

ऐसी अक्षरे रसिके मेळवीन'...

मराठी भाषा की समृद्धि के लिए संतों का बड़ा योगदान

मराठी भाषा की समृद्धि के लिए संतों का सबसे बड़ा योगदान है। उसके बाद साहित्य का इसमें सबसे बड़ा योगदान है। 27 फरवरी यानी कुसुमाग्रज की जयंती पर मराठी भाषा गौरव दिवस मनाया जाता है। लेकिन कुछ लोग इस दिन को मराठी राजभाषा दिवस भी कहते हैं। यह वैसा नहीं है। बता दें की अभी कुछ ही दिन पुर्व 98 वां अ. भा. मराठी साहित्य संमेलन दिल्ली में हर्षोल्हास से संपन्न हुआ।

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