MLA Sanjay Gaikwad Shiv Sena Shinde: महाराष्ट्र में महापुरुषों के इतिहास और वैचारिक किताबों को लेकर राजनेताओं और प्रगतिशील विचारकों के बीच जारी विवाद अब पुलिस थानों से निकलकर सीधे अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। प्रखर वामपंथी विचारक कॉमरेड गोविंद पानसरे द्वारा लिखित बेहद लोकप्रिय और वैचारिक पुस्तक 'शिवाजी कौन थे?' के शीर्षक को लेकर पिछले एक महीने से पश्चिमी महाराष्ट्र और विदर्भ के बुलढाणा जिले में भारी वैचारिक तनाव बना हुआ था। इस पूरे विवाद में मुख्य आरोपी के तौर पर घिरे शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ अब कोल्हापुर पुलिस के शिकंजे में आते दिख रहे हैं।
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब विधायक गायकवाड़ ने पुस्तक के कुछ अंशों पर सार्वजनिक रूप से तीखी आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पुस्तक के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज के वास्तविक इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और प्रगतिशील आंदोलन के नाम पर राजनीति की जा रही है। गायकवाड़ के मुताबिक, लेखक ने पुस्तक के भीतर लगभग 300 से 400 बार महाराज का सामान्य रूप से जिक्र किया है, लेकिन क्रूर आक्रांता औरंगजेब का उल्लेख करते समय एक स्थान पर 'औरंगजेबजी' जैसे सम्मानजनक शब्द का प्रयोग किया है। इस बात से आहत होकर उन्होंने कोल्हापुर के प्रकाशक प्रशांत अंबी को फोन मिलाया था।
विधायक की धमकियों और गाली-गलौज के खिलाफ प्रगतिशील आंदोलनों के कार्यकर्ताओं और खुद प्रकाशक प्रशांत अंबी ने बुलढाणा जिले के चिखली शहर में एक अनूठा और आक्रामक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। यहाँ भारी तनाव और पुलिस बंदोबस्त के बीच "शिवाजी कौन थे?" पुस्तक का सार्वजनिक पठन (Public Reading) किया गया था, जिसके बाद कोल्हापुर के राजारामपुरी पुलिस स्टेशन में विधायक के खिलाफ पहली शिकायत दर्ज कराई गई थी। स्थानीय स्तर पर उचित कानूनी कार्रवाई न होते देख प्रशांत अंबी ने कोल्हापुर सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
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सत्र न्यायालय द्वारा विधायक संजय गायकवाड़ के खिलाफ पुलिस जांच और पूछताछ के आदेश दिए जाने के बाद भी यह विवाद थमता नहीं दिख रहा है। प्रकाशक प्रशांत अंबी ने मीडिया को बताया, "अदालत के इस फैसले के बाद से विधायक के कट्टर समर्थक पूरी तरह बौखला गए हैं। मुझे अब तक अलग-अलग अज्ञात नंबरों से 100 से ज्यादा धमकियों भरे फोन आ चुके हैं। मेरी और मेरे परिवार की जान खतरे में है।" अंबी ने इन सभी फोन कॉल्स और नंबरों की सूची कोल्हापुर पुलिस को सौंपकर अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है।
आगामी विधानसभा चुनावों से ऐन पहले सत्ताधारी दल के एक मौजूदा विधायक के खिलाफ अदालत द्वारा इस प्रकार सीधे कार्रवाई की अनुमति देना मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं है। विपक्ष इस मुद्दे को छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर होने वाली राजनीति और सत्ता पक्ष के नेताओं की गुंडागर्दी के रूप में भुनाने की कोशिश में जुट गया है। अब पूरी राजनीतिक और प्रशासनिक बिरादरी की निगाहें राजारामपुरी पुलिस पर टिकी हैं कि वे सत्ताधारी विधायक संजय गायकवाड़ को पूछताछ के लिए कब समन जारी करते हैं।