राहुल गांधी ने गोकुल दूध संघ चुनाव को लेकर भाजपा पर आरोप लगाए।
गोकुल चुनाव हारने के बाद भाजपा ने जबरन 4 डायरेक्टर बढ़ाए।
राहुल गांधी ने पूरी प्रक्रिया को दूध उत्पादकों के वोट की चोरी बताया।
Rahul Gandhi On Gokul Doodh Sangh: कांग्रेस नेता ओर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए राहुल गांधी ने गोकुल दूध उत्पादक संघ के हालिया घटनाक्रम को लेकर केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया। तो भाजपा ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए लिखा गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया। तो भाजपा ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए। 4 डायरेक्टर ठूंसो, 12 को 16 बनाओ, बहुमत चुराओ। ये दूध उत्पादकों के वोट की चोरी है - जनादेश में मिलावट। भाजपा इतनी हताश हो चुकी है कि हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है। दूध उत्पादकों का वोट चुराने वाले याद रखें - किसान भूलता नहीं।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच एक पर पोस्ट करते हुए महाराष्ट्र सरकार पर गोकुल मिल्क फेडरेशन में दूध उत्पादकों के लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र सरकार लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने की बेशर्म कोशिश कर रही है। इसके लिए वह कानूनी बदलावों का सहारा लेकर, चुने हुए बोर्ड की संरचना में हेरफेर करने का प्रयास कर रही है।
कोल्हापुर के गोकुल दूध संघ में 19 अक्टूबर के चुनावों में, कांग्रेस के नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतीं और महायुति की 12 सीटों के मुकाबले बहुमत हासिल किया। जब महायुति समर्थित निदेशकों ने बैठक से अनुपस्थित रहकर चेयरमैन के चुनाव को रोक दिया, तो बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को फिर से चुनाव कराने का निर्देश दिया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाते हुए लिखा कि चुने हुए बोर्ड को काम करने देने के बजाय, राज्य कैबिनेट ने चार सरकारी निदेशकों को नामित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिन्हें वोट देने का अधिकार भी होगा। इससे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं और दूध उत्पादकों के जनादेश को पलटा जा सकता है।
पवन खेड़ा ने कहा कि बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई सरकार चुनाव के बाद सिर्फ इसलिए नियम बदल सकती है क्योंकि उसे नतीजे पसंद नहीं आए? हम लोकतांत्रिक जनादेश और सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए, इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।