

सहकारी संस्थाओं में 4 सरकारी मनोनीत संचालकों को मतदान का अधिकार।
सतेज पाटिल ने इसे 5.5 लाख किसानों के जनादेश का अपमान बताया।
25 में से 13 सीटें जीतकर भी पाटिल समर्थित गुट की अध्यक्ष पद की राह मुश्किल।
Gokul Doodh Sangh Presidential Election: कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल) के चुनाव परिणाम आने के बाद भी राजनीतिक ड्रामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में संपन्न हुए गोकुल चुनाव में राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी ने 25 में से 13 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जिससे सतेज पाटिल गुट का अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था। वहीं, महायुति के खाते में 12 सीटें आई थीं। हालांकि, अब राज्य सरकार के एक नए फैसले ने पूरे चुनावी गणित को उलटकर रख दिया है।
गोकुल के चुनाव में 13 सीटें जीतने के बावजूद सतेज पाटिल गुट के लिए अध्यक्ष पद हासिल करना मुश्किल होता नजर आ रहा है। महायुति सरकार ने गोकुल सहित तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं में चार सरकारी मनोनीत विशेषज्ञ संचालकों की नियुक्ति और उन्हें मतदान का अधिकार देने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी है। इससे गोकुल के अध्यक्ष पद का चुनावी गणित बदलने की संभावना है।
महायुति सरकार के इस फैसले का महाविकास आघाड़ी और विशेष रूप से सतेज पाटिल ने कड़ा विरोध किया है। गोकुल चुनाव में राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी को 25 में से 13 सीटें मिली थीं, जबकि महायुति के खाते में 12 सीटें आई थीं। इस तरह पाटिल समर्थित गुट ने बहुमत हासिल किया था।
हालांकि, अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए होने वाली बैठक में 14 संचालकों की उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण चुनाव नहीं हो पाया। अब सरकार के चार मनोनीत संचालकों को मतदान का अधिकार मिलने से अध्यक्ष पद की तस्वीर बदल सकती है।
महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने कहा कि साढ़े पांच लाख किसानों ने अपना जनादेश दिया है। यदि सरकार इस जनादेश को नकारने का प्रयास करती है, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। इसके खिलाफ सभी कानूनी विकल्प अपनाएंगे और जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरेंगे।
सतेज पाटिल ने कहा कि बहुमत मिलने के बावजूद केवल कोरम पूरा करने के लिए दो संचालकों का समर्थन मांगने की बात करना महायुति के लिए हास्यास्पद है। पाटिल ने तंज कसते हुए कहा कि यदि संख्या के आधार पर ही सत्ता का फैसला करना है, तो महानगरपालिका में उनके पांच नगरसेवक कम हैं। ऐसे में महायुति उन्हें समर्थन देकर महापौर पद भी उन्हें सौंप दे।
कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने आरोप लगाया कि महायुति सरकार ने उनके पत्र का जवाब देने के लिए यह फैसला लिया है। इस निर्णय से जुड़े पत्र पर हस्ताक्षर कौन करेगा, इसे लेकर महायुति में ही विवाद हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता के समीकरण हमेशा एक जैसे नहीं रहेंगे और 2029 में भी बदल सकते हैं। उस समय आज के फैसलों को याद रखा जाएगा।
सतेज पाटिल ने कहा कि एक-एक वोट की अहमियत होती है। अटल बिहारी वाजपेयी भी प्रधानमंत्री पद के विश्वास मत के दौरान एक वोट से सरकार गंवा चुके हैं। ऐसे में महायुति को भी एक वोट का महत्व समझना चाहिए। पाटिल ने सवाल उठाया कि गोकुल में यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम आखिर किसके हित में चलाया जा रहा है। सरकार के फैसले के बाद अब गोकुल के अध्यक्ष पद का चुनाव और अधिक पेचीदा होने के आसार हैं।