महाराष्ट्र सरकार ने गोकुल दूध संघ चुनाव के बीच सहकारी संस्थाओं के लिए नया अध्यादेश जारी किया है।
इसके तहत 500 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाली संस्थाओं के बोर्ड में पांच सदस्य नामित होंगे।
इनमें से चार विशेषज्ञ सदस्यों को प्रबंधन मंडल की बैठकों में मतदान का अधिकार भी मिलेगा।
Gokul Dudh Sangh Election Cooperative Societies Amendment: महाराष्ट्र में गोकुल दूध संघ के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। इसी बीच राज्य सरकार ने सहकारी संस्थाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण अध्यादेश जारी किया है। इसके तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक सालाना टर्नओवर और सरकारी सहायता प्राप्त करने वाली पात्र संघीय सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन मंडल में सरकार पांच सदस्यों को नामित कर सकेगी। इनमें एक सरकारी अधिकारी और चार विशेषज्ञ शामिल होंगे। खास बात यह है कि चार विशेषज्ञों को बोर्ड की बैठकों में मतदान का अधिकार भी मिलेगा।
महाराष्ट्र सरकार ने 6 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र सहकारी संस्था (सुधारणा) अध्यादेश, 2026 जारी किया। इसके जरिए महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, 1960 की धारा 73AAA में संशोधन किया गया है। यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह प्रावधान राज्य की सभी सहकारी संस्थाओं पर लागू नहीं होगा। इसके दायरे में ऐसी संघीय सहकारी संस्थाएं आएंगी, जिनका सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपये से अधिक है और जिन्हें सरकार से किसी भी रूप में सहायता मिलती है।
इस सहायता में सरकारी शेयर पूंजी, कर्ज, गारंटी, अनुदान, सरकारी जमीन या नकद अथवा वस्तु के रूप में मिलने वाली अन्य मदद शामिल है। जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक को इस प्रावधान से बाहर रखा गया है।
नए अध्यादेश के अनुसार, सरकार संबंधित सहकारी संस्था के प्रबंधन मंडल में पांच सदस्यों को नामित कर सकेगी। इनमें एक सदस्य सहकारिता विभाग का सरकारी अधिकारी होगा, जिसका पद सहकारी संस्थाओं के सहायक निबंधक से नीचे का नहीं होगा।
बाकी चार सदस्य ऐसे विशेषज्ञ होंगे, जिन्हें संबंधित सहकारी संस्था के कामकाज और क्षेत्र का आवश्यक अनुभव तथा योग्यता हासिल हो। इन विशेषज्ञों का चयन सरकार की अधिसूचना के जरिए निर्धारित पात्रता के आधार पर किया जाएगा।
अध्यादेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इन चार विशेषज्ञ सदस्यों को मिलने वाला मतदान का अधिकार है। ये सदस्य प्रबंधन मंडल की बैठकों में वोट दे सकेंगे। हालांकि, सरकार की ओर से नामित सरकारी अधिकारी को मतदान का अधिकार नहीं होगा।
इसके अलावा, सरकार की ओर से नामित कोई भी सदस्य संबंधित समिति का पदाधिकारी यानी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या अन्य निर्वाचित पदाधिकारी नहीं बन सकेगा।
गोकुल दूध संघ के चुनाव और उसके प्रबंधन को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक चर्चा के बीच यह अध्यादेश आया है। बड़े टर्नओवर और सरकारी सहायता प्राप्त करने वाली संघीय सहकारी संस्थाओं के बोर्ड में विशेषज्ञ सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान उनके कामकाज और निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, गोकुल दूध संघ पर इस प्रावधान की सटीक लागू होने की स्थिति उसके कानूनी स्वरूप, टर्नओवर और सरकारी सहायता से जुड़ी शर्तों के आधार पर तय होगी। इसलिए इसे सीधे तौर पर गोकुल के बोर्ड में पांच सदस्यों की नियुक्ति का अंतिम आदेश नहीं माना जाना चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक, बड़े टर्नओवर वाली सहकारी संस्थाओं का राज्य की आर्थिक, वित्तीय और सहकारिता व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। इन संस्थाओं का कामकाज प्रभावी और सुचारु बनाए रखने के लिए अनुभवी और विशेषज्ञ व्यक्तियों की भागीदारी जरूरी है। इसी उद्देश्य से चार विशेषज्ञ सदस्यों को मतदान का अधिकार देने का फैसला किया गया है।
विधानमंडल के दोनों सदन सत्र में नहीं होने और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को देखते हुए राज्यपाल की मंजूरी से यह अध्यादेश जारी किया गया है।