Maratha Reservation Hyderabad Gazette (फोटो क्रेडिट-X) 
जालना

Maratha Reservation: 'चलो मुंबई', मनोज जरांगे की फडणवीस को चेतावनी, वादाखिलाफी पर फिर होगा आंदोलन

Manoj Jarange Patil Mumbai March 2026: मराठा आरक्षण के लिए मनोज जरांगे का मुंबई मार्च का ऐलान। हैदराबाद गजट के आधार पर कुनबी सर्टिफिकेट की मांग और फडणवीस सरकार को सीधी चेतावनी। पढ़ें पूरी खबर।

अनिल सिंह

Maratha Reservation Hyderabad Gazette: मराठा आरक्षण आंदोलन एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। मनोज जरांगे पाटील ने सरकार को दी गई मोहलत खत्म होने के बाद एक बार फिर 'चलो मुंबई' मार्च का बिगुल फूंक दिया है। 18 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार, जरांगे पाटील ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार 'सगे-सोयरे' (रक्त संबंधी) और 'हैदराबाद गजट' के आधार पर कुनबी प्रमाण पत्र देने का अपना वादा पूरा नहीं करती, तो मराठा समुदाय मुंबई में अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए तैयार है।

जरांगे पाटील का सीधा निशाना उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर है, जिन्हें वे आरक्षण की राह में मुख्य बाधा मान रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि सरकार मराठा समाज के धैर्य की परीक्षा न ले।

क्या है 'हैदराबाद गजट' और इसका महत्व?

मराठा आरक्षण की कानूनी लड़ाई में हैदराबाद गजट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बनकर उभरा है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

ऐतिहासिक संदर्भ: 1947 से पहले मराठवाड़ा क्षेत्र निजाम की हैदराबाद रियासत का हिस्सा था। उस समय के आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड (गजट) में कई मराठा परिवारों को 'कुनबी' (खेतिहर समुदाय) के रूप में दर्ज किया गया था।

आरक्षण का आधार: वर्तमान में 'कुनबी' जाति महाराष्ट्र में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी के अंतर्गत आती है। यदि किसी मराठा परिवार के पूर्वजों का नाम हैदराबाद गजट में 'कुनबी' के रूप में मिलता है, तो वे कानूनी रूप से OBC आरक्षण के पात्र हो जाते हैं।

जरांगे की मांग: मनोज जरांगे की मांग है कि सरकार केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड के बजाय इस गजट को व्यापक आधार मानकर पूरे मराठा समाज को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करे, ताकि उन्हें OBC कोटे से आरक्षण मिल सके।

ताजा घटनाक्रम और चेतावनी

मार्च की तैयारी: जरांगे पाटील ने जून 2026 से दोबारा भूख हड़ताल और आवश्यकता पड़ने पर मुंबई कूच करने का इशारा दिया है। उन्होंने कहा कि मराठा समाज अब और इंतजार करने के मूड में नहीं है।

सरकार का पक्ष: देवेंद्र फडणवीस सरकार ने 'हैदराबाद गजट' को एक वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार तो किया है, लेकिन 'सगे-सोयरे' (रिश्तेदारों को भी कुनबी दर्जा देना) के मुद्दे पर कानूनी अड़चनों का हवाला दे रही है।

प्रशासनिक हलचल: सरकार ने हाल ही में हैदराबाद गजट के आधार पर वंशावली की जांच के लिए जिलाधिकारियों की बैठकें बुलाई हैं, ताकि पात्र लोगों को प्रमाण पत्र दिए जा सकें। हालांकि, आंदोलनकारी इसे केवल 'देरी करने की रणनीति' मान रहे हैं।

मराठा आरक्षण की आग एक बार फिर सुलगने लगी है। मनोज जरांगे पाटील ने एक बार फिर मुंबई कूच का बिगुल फूंकते हुए देवेंद्र फडणवीस सरकार को सीधी चेतावनी दी है। इस बार विवाद के केंद्र में है 'हैदराबाद गजट' एक ऐसा ऐतिहासिक दस्तावेज जो मराठा समुदाय को कुनबी (OBC) प्रमाण पत्र दिलाने की चाबी माना जा रहा है। जरांगे का कहना है कि यदि सरकार ने अपना वादा तोड़ा, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे। 1947 से पहले मराठवाड़ा, निजाम की हैदराबाद रियासत का हिस्सा था, और उसी समय के आधिकारिक रिकॉर्ड आज आरक्षण की कानूनी लड़ाई का सबसे बड़ा आधार बन गए हैं।

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