Manoj Jarange Blood Sugar Readings: मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे के आमरण अनशन का मंगलवार को चौथा दिन है। लगातार अनशन के बीच डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत की नियमित जांच कर रही है।
इसी दौरान ब्लड शुगर लेवल की अलग-अलग रीडिंग सामने आने के बाद जरांगे ने इसकी जांच और स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। जरांगे के अनुसार, अनशन शुरू होने से पहले उनका ब्लड शुगर लेवल 94 था, जो दूसरे दिन घटकर 66 तक पहुंच गया। इसके बाद हुई जांच में शुगर लेवल 72 और फिर 80 दर्ज किया गया।
रीडिंग में इस तरह बदलाव आने पर जरांगे ने सवाल उठाया कि यदि शुगर 66 तक गिर गई थी, तो बाद में यह 72 और 80 तक कैसे पहुंची। उन्होंने कहा कि उन्हें डॉक्टरों पर सीधे तौर पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन पूरे मामले में किसी तरह का भ्रम नहीं रहना चाहिए और जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।
जरांगे ने कहा कि उनकी सेहत और ब्लड शुगर को लेकर यदि किसी को कोई संदेह है, तो आंदोलन स्थल पर ही आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराकर जांच की जानी चाहिए। उन्होंने मेडिकल टीम से तत्काल आधुनिक उपकरण लाकर जांच करने और स्थिति का पूरी तरह 'सोक्षमोक्ष' करने की मांग की।
ब्लड शुगर में बदलाव को लेकर उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कहीं इसके पीछे सरकार का कोई षडयंत्र तो नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका डॉक्टरों पर सीधा आरोप या संदेह नहीं है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में हर पहलू साफ होना जरूरी है।
जरांगे ने कहा कि उनका आमरण अनशन मराठा समाज की मांगों को लेकर जारी है और वह अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर मेडिकल टीम की निगरानी बनी हुई है और नियमित जांच की जा रही है।
मनोज जरांगे की शंका सामने आने के बाद उनकी मेडिकल जांच कर रही टीम ने ब्लड शुगर की अलग-अलग रीडिंग को लेकर स्पष्टीकरण दिया। डॉक्टरों के अनुसार, अलग-अलग समय पर ब्लड शुगर की जांच करने पर रीडिंग में कुछ अंतर आना सामान्य हो सकता है।
थोड़े अंतराल में शुगर लेवल का ऊपर-नीचे होना अपने आप में किसी असामान्य स्थिति का संकेत नहीं माना जा सकता। मेडिकल टीम ने जरांगे के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर उनकी शंकाओं का समाधान किया। डॉक्टरों ने बताया कि जांच के समय, शरीर की स्थिति और अन्य परिस्थितियों के अनुसार ब्लड शुगर की रीडिंग में बदलाव हो सकता है।
टीम ने स्पष्ट किया कि 66 से 72 और फिर 80 तक रीडिंग में बदलाव को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। फिलहाल डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर रख रहे हैं और आवश्यक मेडिकल जांच की जा रही है।