

Rift Over Manoj Jarange And Marathi Language: महाराष्ट्र सरकार की आज राज्य मंत्रिमंडल बैठक में भारी राजनीतिक गहमागहमी और मंत्रियों की नाराजगी देखने को मिली। एक तरफ जहां मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल के तीखे बयानों से सरकार के कुछ मंत्री असहज महसूस कर रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ ऑटो रिक्शा-टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए दी गई एक साल की छूट से भी सरकार के भीतर असंतोष पनप रहा है। इन दोनों फैसलों के कारण कैबिनेट बैठक में मंत्रियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आये।
मनोज जरांगे पाटिल लगातार सरकार की नीतियों और शीर्ष मंत्रियों पर सीधे व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री पर की जा रही लगातार बयानबाजी से कई मंत्रियों का मानना है कि जनता के बीच सरकार की छवि खराब हो रही है। मंत्रियों का यह भी तर्क है कि स्थिति को संभालने के लिए सरकार को जरांगे के साथ बेहतर और सीधा संवाद स्थापित करना चाहिए।
परिवहन मंत्री द्वारा ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को लेकर लिए गए फैसले को बदलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चालकों को एक साल की मोहलत दे दी है। मुख्यमंत्री के इस कदम से शिवसेना के मंत्री नाराज बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि अचानक फैसला बदलने से स्थानीय नागरिकों और मराठी भाषी जनता के बीच गलत संदेश गया है।
महाराष्ट्र सरकार के सामने इस समय दो अहम मुद्दों को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। मनोज जरांगे पाटिल के बयानों और ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए दी गई एक साल की मोहलत को लेकर मंत्रियों में नाराजगी बताई गई। ऐसे में आज की राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा भी हुई। कुछ मंत्री फैसलों और सरकार की रणनीति पर अपनी असहमति खुलकर रखें।