मनोज जरांगे और अभिजीत दीपके (सोर्स: सोशल मीडिया)
जालना

जल्द अनशन खत्म करें मनोज जरांगे... अनशन स्थल पर मिलने पहुंचे अभिजीत दीपके, सरकार पर कसा तीखा तंज

Maratha Reservation Protest: मराठा आरक्षण नेता मनोज जरांगे के अनशन के 14वें दिन अभिजीत दीपके उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य की चिंता जताते हुए अनशन खत्म करने की अपील की और सरकार पर हमला बोला।

गोरक्ष पोफली

Abhijit Dipke Meets Manoj Jarange Patil: महाराष्ट्र के सामाजिक और राजनीतिक माहौल में मनोज जरांगे पाटील का अनशन लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पिछले 14 दिनों से अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटील से मुलाकात करने के लिए अभिजीत दीपके अनशन स्थल पर पहुंचे।

इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मनोज जरांगे पाटील के स्वास्थ्य की स्थिति का हाल-चाल जाना और उनकी गिरती सेहत को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। अनशन स्थल पर हुई इस मुलाकात के दौरान अभिजीत दीपके ने मनोज जरांगे पाटील से अपना अनशन वापस लेने की भावुक अपील की और साथ ही राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला।

अनशन खत्म करने की दिल से की अपील

अभिजीत दीपके ने अनशन स्थल पर पहुंचकर मनोज जरांगे पाटील से बात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। 14 दिनों से जारी अनशन के कारण शरीर पर पड़ रहे असर को देखते हुए दीपके ने उनसे सहृदय और मन से यह प्रार्थना की कि वे अपना यह उपोषण वापस ले लें और अपनी सेहत का ध्यान रखें।

दीपके ने कहा कि आज पूरे महाराष्ट्र को मनोज जरांगे पाटील की अत्यंत आवश्यकता है। राज्य की जनता और समाज के भविष्य के लिए उनका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है, इसलिए उन्हें अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने का निर्णय लेना चाहिए।

शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरा

मनोज जरांगे पाटील से मुलाकात के बाद अभिजीत दीपके ने राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक विफलता पर जमकर निशाना साधा। सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के विकास और भविष्य पर ध्यान दिया होता, तो आज यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर सरकार ने ग्रामीण इलाकों में रहने वाले युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और अच्छी शिक्षा प्रदान की होती तथा उनके लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर उत्पन्न किए होते, तो मनोज जरांगे पाटील साहेब पर आज अनशन करने की नौबत ही नहीं आती। दीपके के अनुसार, यह अनशन सरकार की नीतियों और युवाओं की अनदेखी का ही सीधा परिणाम है।

सरकार पर से जनता का भरोसा उठ चुका है

अभिजीत दीपके ने सरकार की साख और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मनोज जरांगे पाटील का यह अनशन केवल एक आंदोलन नहीं है, बल्कि यह वर्तमान स्थिति का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जरांगे पाटील साहेब का यह उपोषण ही यह साफ-साफ दिखाता है कि आम जनता का अब इस सरकार पर कोई भरोसा या विश्वास नहीं रह गया है।

जब सरकार युवाओं को शिक्षा और रोजगार देने में असफल रहती है, तब जनता का विश्वास टूट जाता है और जननेताओं को अपना अधिकार मांगने के लिए 14-14 दिनों तक अनशन पर बैठने को मजबूर होना पड़ता है।

अभिजीत दीपके की इस अनशन स्थल मुलाकात ने एक तरफ जहां मनोज जरांगे पाटील के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र की जरूरत को रेखांकित किया, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण युवाओं के शिक्षा और रोजगार के सवाल पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 14 दिनों से जारी अनशन के बीच अभिजीत दीपके द्वारा मनोज जरांगे पाटील से अनशन खत्म करने की विनती और सरकार पर कसा गया यह तंज अब राज्य भर में चर्चा का विषय बन गया है।

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