

Manoj Jarange Hunger Strike Abhijit Dipke Support: मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र का राजनीतिक और सामाजिक माहौल एक बार फिर पूरी तरह से गर्मा गया है। मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरा बन चुके मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर भूख हड़ताल शुरू कर दिया है और इस बार उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे।
इस बीच, आंदोलन को एक नया और बड़ा समर्थन मिला है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने मनोज जरांगे पाटिल के इस आमरण अनशन को अपना खुला समर्थन घोषित कर दिया है और सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा है।
अभिजीत दीपके ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर मनोज जरांगे पाटिल जैसे व्यक्ति को बार-बार आंदोलन की राह पर क्यों जाना पड़ रहा है? उन्होंने कहा कि जब भी कोई व्यक्ति आंदोलन का रास्ता चुनता है, तो वह उसके सामने बचा हुआ सबसे आखिरी विकल्प होता है। सरकार खुद देश के आम नागरिकों को आंदोलन की राह पर धकेल रही है और उन्हें इसके लिए मजबूर कर रही है।
दिपके ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सीधा सवाल किया, अगर सरकार ने समाज के बच्चों को अच्छी शिक्षा दी होती और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए होते, तो क्या मनोज जरांगे पाटिल को इस तरह आंदोलन की शरण में जाना पड़ता? उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मराठा समाज के छात्रों को समय पर उचित शिक्षा और रोजगार के साधन न मिल पाना पूरी तरह से सरकार की नाकामी और विफलता का प्रमाण है।
अभिजीत दीपके ने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में नसीहत दी कि वह इस संवेदनशील मुद्दे को हल्के में न ले और तुरंत मनोज जरांगे पाटिल के साथ बैठकर चर्चा करे और इसका कोई सम्मानजनक समाधान निकाले। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए अपने पिछले आंदोलन का उदाहरण देते हुए सरकार को सचेत किया।
दिपके ने कहा, जंतर-मंतर पर हमारे आंदोलन के दौरान सरकार ने आंदोलनकारियों को पूरे 35 दिनों तक सड़क पर बिठाए रखा था। सरकार 31 दिनों के बीत जाने के बाद पहली बार हमसे बातचीत करने के लिए आगे आई थी। लेकिन सरकार को मनोज जरांगे सर के साथ ऐसा व्यवहार दोहराने की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। उनके साथ तुरंत बैठें, सकारात्मक चर्चा करें और इस समस्या का तुरंत कोई तोड़ निकालें।
मनोज जरांगे पाटिल की मांगों को पूरी तरह उचित ठहराते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि जरांगे पाटिल कोई नाजायज या गलत मांग नहीं कर रहे हैं। वे केवल मराठा समाज के बच्चों के लिए उनके हक की शिक्षा और रोजगार का अधिकार ही मांग रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि वे बहुत जल्द व्यक्तिगत रूप से मनोज जरांगे पाटिल से मुलाकात करने के लिए उनके आंदोलन स्थल पर जाएंगे।
दीपके ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट की टाइपिंग परीक्षा से जुड़ी उनकी मांग को तो सरकार ने स्वीकार कर लिया है। लेकिन, आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज किए गए मुकदमों और कानूनी मामलों को वापस लेने की मांग अभी भी पूरी नहीं हुई है और वह लंबित पड़ी हुई है।
उन्होंने सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेताया कि यदि सरकार ने इस लंबित मांग पर जल्द ही कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो वे दोबारा सड़क पर उतरेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यह नया आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन से भी कहीं अधिक विशाल और उग्र होगा।