Rohini Khadse SRPF Paper Leak: जलगांव में मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए राकांपा (शरद पवार गुट) की वरिष्ठ नेता रोहिणी खडसे ने राज्य की महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के 22 लाख और महाराष्ट्र के करीब ढाई लाख मेडिकल परीक्षार्थियों का भविष्य बर्बाद करने वाले लातूर के शिक्षा माफिया शिवराज मोटेगांवकर को सीबीआई ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। केंद्रीय एजेंसी इस मामले में त्वरित गिरफ्तारियां कर रही है, लेकिन इसी महाराष्ट्र में राज्य पुलिस दल की एसआरपीएफ (SRPF) भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुए हफ्तों बीत जाने के बाद भी राज्य प्रशासन के हाथ अब तक खाली हैं।
रोहिणी खडसे ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में होने वाली लगभग हर सरकारी भर्ती परीक्षा में अब भ्रष्टाचार और पेपर लीक का एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है। एसआरपीएफ लेखी परीक्षा के दौरान भी हाई-टेक गैजेट्स और एडवांस में पेपर लीक करने का वही 'लातूर-पुणे' पैटर्न अपनाया गया था, जो नीट परीक्षा में देखने को मिला है। उन्होंने पूछा कि जब दोनों घोटालों का स्वरूप एक जैसा है, तो राज्य पुलिस अपने ही विभाग की परीक्षा के गुनहगारों को पकड़ने में इतनी सुस्ती क्यों दिखा रही है?
छात्रों के साथ हो रहे अन्याय पर नाराजगी जताते हुए रोहिणी खडसे ने मुख्यमंत्री और गृह विभाग से मांग की कि एसआरपीएफ भर्ती मामले की जांच को दबाने के बजाय इसके लिए एक उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक इस रैकेट के मास्टरमाइंड और इसमें शामिल प्रशासनिक अधिकारियों को बेनकाब नहीं किया जाता, तब तक राज्य के गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले उन युवाओं को न्याय नहीं मिलेगा जो दिन-रात मेहनत कर पुलिस बल में शामिल होने की तैयारी करते हैं।
विधान परिषद की 16 सीटों के लिए जून में होने वाले चुनावों और आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले रोहिणी खडसे का यह बयान सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। विपक्षी दल अब नीट घोटाले के साथ-साथ राज्य की एसआरपीएफ भर्ती, तलाठी भर्ती और टीसीएस (TCS) परीक्षा गड़बड़ियों को जोड़कर राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार देने और पारदर्शी परीक्षा कराने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।