Gandhi Research Foundation Event ( Source: Social Media ) 
जलगांव

जलगांव में गांधी विचारों पर मंथन, तीन दिवसीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित; नैतिक राजनीति पर जोर

Jalgaon Gandhi Conference: जलगांव में गांधी रिसर्च फाउंडेशन द्वारा तीन दिवसीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें विद्वानों ने 21वीं सदी में महात्मा गांधी के विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा की।

अंकिता पटेल

Gandhi Research Foundation Event: जलगांव आज के दौर में महात्मा गांधी के विचार सिर्फ किताबों तक सीमित रह गए हैं या वे अब भी समाज को दिशा दे सकते हैं? इसी सवाल के साथ जलगांव में तीन दिवसीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित हुआ, जहां देशभर के विद्वानों ने गांधी दर्शन को नए संदर्भ में परखा।

गांधी रिसर्च फाउंडेशन द्वारा 26 से 28 मार्च के बीच गांधी तीर्थ परिसर में आयोजित इस सम्मेलन में 21वीं सदी के गांधी विषय पर गंभीर चर्चा हुई, कार्यक्रम की रूपरेखा सहायक प्राध्यापक बरुण मित्रा के विचारों पर आधारित थी। इस गांधी जी के विचारों को लेकर कहा गया कि राजनीति का उद्देश्य नैतिक शक्ति को जगाना होना चाहिए न कि सत्ता प्राप्त करने का उद्देश्य।

सिर्फ संस्थाओं से नहीं चलता 'कानून का शासन'

सम्मेलन में डॉ. कृष्णा गांधी, राज चेरुबल, सुनील जोसेफ, प्रा. मनीष शर्मा, कुमार आनंद, अंशु चौधरी, प्रा. तालीम अख्तर और डॉ. पार्थ शाह सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया। फाउंडेशन के संचालक डॉ. सुदर्शन अय्यंगार और प्रा. गीता धर्मपाल की उपस्थिति भी उपस्थिति रहीं। चर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि कानून का शासन' केवल संस्थाओं से नहीं चलता, बल्कि समाज की नैतिक शक्ति और मूल्यों पर आधारित होता है। वक्ताओं ने चिता जताई कि बीते वर्षों में कानून और नीतियों के बढ़ते दायरे ने समाज की स्वायत्तता को कमजोर किया है।

आरक्षण पर भी उठाए गए सवाल

सम्मेलन में डॉ. बाबासाहेब आबेडकर के संदर्भ में आरक्षण और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से इससे वंचित वर्गों को अवसर मिले, लेकिन अब इसके दीर्घकालीन प्रभावों पर विवार जरूरी है।

विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक व्यवस्था व्यक्ति केंद्रित है, जबकि भारतीय समाज पारंपरिक रूप से समुदाय आधारित रहा है। इससे सामाजिक संस्थाएं कमजोर हुई हैं और राज्य की भूमिका अधिक मजबूत हुई है।

गांधी जी का रास्ता आज भी प्रासंगिक

गांधी जी के विचारों का जिक्र करते हुए कहा गया कि राजनीति का उद्देश्य सता नहीं, बल्कि समाज की नैतिक शक्ति को जगाना होना चाहिए, अहिंसा को समाज को संगठित और सशक्त बनाने का माध्यम बताया गया। तीन दिन तक चला यह सम्मेलन सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि प्रतिभागियों के लिए गहन आत्ममंथन का मंच साबित हुआ।

PM Modi 25 Years of Seva Live: जनसेवा के 25 साल पूरे, पीएम नरेंद्र मोदी दिल्ली में जनता को कर रहे संबोधित

विपक्षी पार्टियों का रण अभी बाकी! कांग्रेस ने सभी सांसदों को लंच पर बुलाया, ECI से मिलने के लिए मसौदा तैयार

राहुल और प्रियंका गांधी समेत कई सांसदों के खिलाफ FIR, आकाशवाणी कार्यालय में जबरन घुसने का आरोप

25 साल का सफर... गुजरात से दिल्ली तक, पीएम मोदी आज विकसित भारत संकल्प सभा में सुनाएंगे अपनी कहानी

PM नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे, श्री विनायक मंदिर में की पूजा-अर्चना, नेताओं ने दी बधाई