Kulbhushan Patil vs Zakir Khan: भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता किरीट सोमैया ने पूरे महाराष्ट्र में 'फर्जी जन्म प्रमाण पत्र' के खिलाफ एक बड़ी मुहिम छेड़ रखी है। लेकिन अब यही मुद्दा भाजपा के लिए गले की हड्डी बनता नजर आ रहा है। जलगांव में शिवसेना (UBT) के नेता और पूर्व उपमहापौर कुलभूषण पाटील ने भाजपा के नवनिर्वाचित पार्षद जाकिर रसूल खान पर गंभीर आरोप लगाते हुए ऐसे दस्तावेज पेश किए हैं, जिसने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।
पाटील का दावा है कि पार्षद जाकिर खान ने चुनाव आयोग को गुमराह किया है और सरकारी लाभ लेने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर की है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा पार्षद की दो बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र को लेकर हुआ है।
कुलभूषण पाटील ने जलगांव नगर निगम के जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग द्वारा जारी किए गए दो प्रमाण पत्र मीडिया के सामने रखे हैं। इन दस्तावेजों के अनुसार, पार्षद की एक बेटी का जन्म 2 सितंबर 2000 को हुआ है, जबकि दूसरी बेटी का जन्म मात्र 15 दिन बाद 17 सितंबर 2000 को दर्ज है। जैविक रूप से यह असंभव है, जिसके आधार पर पाटील ने आरोप लगाया है कि ये प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी हैं और केवल चुनाव लड़ने की योग्यता हासिल करने के लिए बनवाए गए हैं।
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विवाद केवल जन्म की तारीखों तक सीमित नहीं है। चुनाव हलफनामे (Affidavit) में जाकिर खान ने अपनी केवल तीन संतानों की जानकारी दी है। हालांकि, कुलभूषण पाटील का दावा है कि पार्षद की असल में पांच संतानें हैं। महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के नियमों के अनुसार, दो से अधिक संतान होने पर उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है। पाटील ने नगर निगम आयुक्त और जलगांव शहर पुलिस स्टेशन में इस धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई है और एक महीने के भीतर कार्रवाई न होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
यह मामला भाजपा के लिए इसलिए भी फजीहत का सबब बना है क्योंकि किरीट सोमैया लगातार अल्पसंख्यक समुदाय और विपक्षी नेताओं को फर्जी प्रमाण पत्रों के मुद्दे पर घेरते रहे हैं। अब खुद भाजपा के पार्षद पर इसी तरह के आरोप लगने से शिवसेना (UBT) को पलटवार करने का मौका मिल गया है। दूसरी ओर, पार्षद जाकिर खान ने इन आरोपों को 'राजनीति से प्रेरित' करार दिया है। उनका कहना है कि सभी प्रमाण पत्र वैध हैं और मामला कोर्ट में विचाराधीन है, जहां जल्द ही सच्चाई सामने आएगी।