ट्रेन के अंडरफ्रेम, साइड वॉल, छत और कोच असेंबली की प्रक्रिया देखी।
स्क्वीज टेस्ट के जरिए ट्रेन के ढांचे की मजबूती और स्थिरता जांची जाती है।
कपलर्स और कोच के तकनीकी जुड़ाव की भी समीक्षा की गई।
Ashwini Vaishnaw Bullet Train Manufacturing Inspection: देश की पहली बुलेट ट्रेन का सपना अब तेजी से जमीन पर साकार हो रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को बेंगलुरु स्थित आदित्य उत्पादन केंद्र का दौरा कर देश में तैयार की जा रही स्वदेशी बुलेट ट्रेन के निर्माण कार्य की विस्तार से समीक्षा की।
रेल मंत्री ने ट्रेन के विभिन्न हिस्सों के निर्माण, उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों और सुरक्षा मानकों का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री ने ट्रेन की बॉडी तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक और बेहद सटीक इंजीनियरिंग उपकरणों के साथ-साथ विशेष विनिर्माण ढांचे को देखा।
अश्विनी वैष्णव ने ट्रेन के निचले ढांचे यानी अंडरफ्रेम, साइड की दीवारों, छत की असेंबली, पूरे डिब्बे को जोड़ने की प्रक्रिया और उसके बाहरी हिस्से की फिनिशिंग जैसे महत्वपूर्ण चरणों की पड़ताल की। हाई-स्पीड पर ट्रेन के सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक मजबूती, सटीकता और तय गुणवत्ता मानकों को हासिल करने की दृष्टि से यह उन्नत उत्पादन प्रक्रिया बेहद अहम मानी जा रही है।
दौरे के दौरान रेल मंत्री ने खास स्क्वीज टेस्ट का मुआयना किया। इस प्रक्रिया में ट्रेन के ढांचे पर नियंत्रित दबाव और खिंचाव डालकर उसकी मजबूती, संतुलन और स्थिरता जांची जाती है। हाई-स्पीड रफ्तार में यात्रियों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह जांच बेहद निर्णायक है।
रेल मंत्री ने यात्री सीटों, हीटिंग, वेंटिलेशन, एयर कंडीशनिंग सिस्टम और डिब्बों को जोड़ने वाले कपलर्स की बारीकी से पड़ताल की। उन्होंने हाई-स्पीड सफर में यात्रियों की सुविधा, आराम और साइड व रूफ मॉड्यूल के तकनीकी जुड़ाव पर विशेष जोर दिया।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में ही बुलेट ट्रेन का निर्माण रेलवे के लिए बड़ी उपलब्धि है। बेंगलुरु यूनिट से इस प्रोजेक्ट को नई गति मिली है और अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह भारतीय बुलेट ट्रेन जल्द ही पटरियों पर दौड़ती दिखेगी।