हिंगोली के लिंबाला गांव में धरने पर बैठे अभिजीत दिपके व ग्रामीण सोर्स: एक्स/@abhijeet_dipke
हिंगोली

स्कूल में दारू पीकर आता था प्रिंसिपल, हिंगोली में अभिजीत दिपके के धरना प्रदर्शन और चेतावनी के बाद हुआ सस्पेंड

Abhijeet Dipke Hingoli Protest: हिंगोली में दारू पीकर स्कूल आने वाले प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया। अभिजीत दिपके और ग्रामीणों के धरना प्रदर्शन के बाद आरोपी प्रिंसिपल पर कार्रवाई की गई।

आकाश मसने

Limbala Village School Principal Suspended: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा देशभर में चलाए जा रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। हिंगोली जिले के लिंबाला गांव स्थित जिला परिषद स्कूल के प्रिंसिपल पर गाज गिरी है। लंबे समय से शराब पीकर स्कूल आने और शैक्षणिक माहौल खराब करने के आरोपी प्रिंसिपल को आखिरकार शिक्षा विभाग ने सस्पेंड कर दिया है।

लिंबाला गांव के स्कूल का शराबी प्रिंसिपल सस्पेंड

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने बताया कि हिंगोली जिले में लिंबाला गांव के स्कूल के शराबी प्रिंसिपल पर कार्रवाई हुई है। उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। प्रिंसिपल दारू पीकर स्कूल आता था। इस दौरान उन्होंने अब्दुल और उसके दिवंगत पिता का भी जिक्र किया।

अभिजीत दिपके ने अब्दुल को किया धन्यवाद

CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि हिंगोली जिले के लिंबाला गांव वालों के लिए यह पहली बड़ी जीत है। शराबी प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया है। मैं यह जीत अब्दुल और उनके पिता को समर्पित करना चाहता हूं। जैसा कि अब्दुल ने कल कहा था कि अब रुकना नहीं है, स्कूल ठीक करके ही रहेंगे।

गांव वालों की 5 शिकायतों के बाद भी नहीं हुई थी कार्रवाई

अभिजीत दिपके ने बताया कि वे रविवार को हिंगोली जिले के लिंबाला गांव पहुंचे थे तब लोगों ने शराबी शिक्षक को लेकर उनसे शिकायत की थी। गांव वालों ने कहा कि अभी तक पांच बार लिखित में शिकायत की थी। इसके बावजूद भी यहां के अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन जब हमने शनिवार को ये मुद्दा उठाया और हमने कहा कि अगर उस प्रिसिंपल को हटाया नहीं जाता है तो हम यहां पर आंदोलन करेंगे। आज सुबह उस प्रिंसिपल को हटाया गया।

बच्चों के लिए डेस्क और बेंच की मांग

अभिजीत दिपके ने कहा कि यह जीत गांव वालों की है। गांव वालों ने आगे आकर धरना प्रदर्शन किया। इसी वजह से ये फैसला हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी केवल प्रिंसिपल को हटाया है, लेकिन जब तक यहां नए शिक्षकों की नियुक्ति और बच्चों के लिए डेस्क और बेंच नहीं आ जाते तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

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