महिला बचत गट (सौजन्य-नवभारत) 
गोंदिया

खेती, पोल्ट्री, मसाला उद्योग…हर क्षेत्र में आगे बढ़ीं गोंदिया जिले की महिलाएं, कर्ज वितरण में पाया तीसरा स्थान

Women Empowerment India: गोंदिया जिले की 89 हजार महिलाओं ने बचत गट के जरिए आर्थिक उन्नति की। कर्ज वितरण में जिला राज्य में तीसरे नंबर पर, महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर।

प्रिया जैस

Rural Women Entrepreneurship: बेरोजगार महिलाओं के लिए काम देने के लिए बचत गट बनाए गए। जिले की 89 हजार महिलाओं ने बचत गट के जरिए कर्ज लेकर अपनी आर्थिक उन्नति हासिल की है। महिलाओं ने एक साथ आकर बचत गट के जरिए अपना रोजगार शुरू किया है। उन्होंने छोटे-मोटे उद्योग शुरू किए हैं। जिले में बचत गट की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए बड़ी मात्रा में कर्ज बांटे गए।

जिससे जिला बचत गट को कर्ज देने में राज्य में तीसरे नंबर पर है। जिले के आठ तहसील के 416 गांवों में 7,256 बचत गट हैं और इन बचत गट में से सैकड़ों बचत गट को 488.8 करोड़ रुपये का कर्ज वितरित गया। कर्ज के रूप में ली गई रकम से जिले की महिलाओं ने सबसे ज्यादा बकरी पालन और दूसरे व्यवसाय की तरफ रुख किया। जिले में कई गट ने अपनी डेयरी शुरू की है।

महिलाओं ने शुरू किया खुद का रोजगार

इन बचत गट के जरिए महिलाओं ने बिना कोई पैसा खर्च किए अगरबत्ती, मोमबत्ती, पोल्ट्री फार्म, आलू की खेती का काम किया है। महिलाओं ने खुद का रोजगार शुरू करने का फैसला किया है। ज्यादा कर्ज की जरूरत वाली 5 महिलाओं को साथ लाकर उनके लिए एक संयुक्त गट बनाया है। उन्हें करोड़ों का कर्ज साथ ही, मुद्रा योजना का लाभ भी दिया है। जिले के कुछ बचत गट ने महिला बचत गट के जरिए खेती, पोल्ट्री फार्मिंग, बकरी पालन, सुअर पालन, मछली पालन, डेयरी फार्मिंग, दाल प्रक्रिया, मसाला उद्योग, पापड़ उद्योग, किराना दुकानें, ज्वेलरी, रसवंती गृह, रेस्टोरेंट, सब्जी बेचना, ट्रेडिंग व्यवसाय आदि शुरू किए हैं। कुछ बचत गट कीमती गहने बनाकर उन्हें बाजार में बेचने की हालत में पहुंच गए हैं।

कारोबार शुरू करने में उपयोगी साबित

स्वयं सहायता समूह अच्छे का काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें बैंक से आसानी से कर्ज मिल जाता है। समूह परिवार उभारने के लिए कारोबार शुरू करने में उपयोगी साबित हो रहे हैं।

  • संगीता भोंगाडे, वरिष्ठ जिला समन्वय अधिकारी, गोंदिया

अधिकारियों ने समय पर किया सहयोग

हमने महिला आर्थिक विकास महामंडल के जरिए आभा महिला स्वयं सहायता समूह शुरू किया। हमने चार-पांच साल पहले इससे दूध और डेयरी का व्यवसाय शुरू किया था। इसके लिए करीब 5 लाख रुपये का कर्ज लिया था। लिया गया कर्ज चुका दिया है और अब व्यवसाय नेट फायदे पर चल रहा है। इस व्यवसाय से हमने उन्नति की है। उन्होंने यह भी कहा कि महामंडल के अधिकारियों ने समय-समय पर सहयोग किया है।

  • ममता ब्राह्मणकर, सदस्य, आभा महिला बचत गट, बोरकन्हार, सालेकसा

बकरी पालन केंद्र

जिले में महिला स्वयं सहायता समूह बड़े पैमाने पर बकरी पालन के कारोबार में लगे हुए हैं, इसलिए अब देवरी और सड़क अर्जुनी तहसील के 15 से 20 स्वयं सहायता समूह एक साथ आए हैं। उन्होंने बकरी पालन केंद्र शुरू किए हैं। उस बकरी केंद्र की एक महिला उन बकरियों की देखभाल करती है। उसे उसकी मजदूरी दी जाती है। उसका नाम पशु सखी रखा गया है।

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