सालेकसा पर्यटन स्थल (सोर्सः सोशल मीडिया)
गोंदिया

गोंदिया के सालेकसा में प्राकृतिक खूबसूरती का खजाना, विकास की राह देख रहा पर्यटन स्थल

Salekasa Tourist Place: गोंदिया जिले के सालेकसा में महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित पहाड़, घने जंगल, दो गुफाएं और खिंडसी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यह स्थल अब भी विकास की प्रतीक्षा कर रहा है।

आंचल लोखंडे

Highlights:

  • गोंदिया जिले की सालेकसा तहसील से करीब 20 किलोमीटर दक्षिण में महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर यह प्राकृतिक स्थल स्थित है।

  • घने जंगलों और पहाड़ों के बीच स्थित दो गुफाएं आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र हैं।

  • यहां शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर और हनुमान मंदिर भी हैं, जहां महाशिवरात्रि और नवरात्रि उत्साह से मनाए जाते हैं।

Natural Tourist Places In Gondia: महाराष्ट्र का अंतिम छोर गोंदिया जिला प्राकृतिक वनसंपदा, पर्यावरण से सटा हुआ है, आदिवासी अति संवेदनशील क्षेत्र में आज भी प्राकृतिक स्थल को संस्कृति ने संभाल रखा है जो वर्तमान में विकास के लिए प्रतीक्षा कर रहे है। महाराष्ट्र- छत्तीसगढ़ की सीमा पर सालेकसा तहसील मुख्यालय से दक्षिण में 20 किमी. दूरी पर स्थित विशाल पहाड़, घनघोर जंगल जिसे सातपुड़ा पर्वत श्रृंखला से नवाजा जाता है, जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस स्थान को धार्मिक स्थल भी कहा जाता है।

यहां के पहाड़ों में स्थित 2 गुफाएं है जो आदिवासी समाज के कुल दैवत यहां पूजे जाते है। कहा जाता है कि यहां की एक गुफा जो कचारगड़ गुफा में संगम, मिलान होता है, इसी स्थल पर उन्नीस सौ उंचास में कम्युनिष्ट पार्टी के ब्रजलाल मोहने ने शिवलिंग की स्थापना की थी। गुफा के अलावा शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर, हनुमान मंदिर भी है। 1985-86 में पांडुरमेटा गांव का पुनर्वसन डोमाटोला गांव में हुआ तब से इस स्थल पर आना जाना, पूजा-अर्चना, पर्यटकों का आना शुरू हुआ।

विकास निश्चित तौर पर पूरा होगा

1992 में शिवजी की मूर्ति स्थापित की गई। यहां महाशिवरात्रि, नवरात्रि पर्व भी काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। आसपास के ग्रामवासियों द्वारा ज्योति कलश स्थापित कर महाप्रसाद भंडारा का आयोजन होता है। इस स्थल पर सैंकड़ों पर्यटक आते जाते रहते है।

क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी इस पर्यटन स्थल का दर्शन किया। स्थानीय नागरिकों द्वारा यहां के विकास को लेकर चर्चाएं भी की गई लेकिन वर्तमान में अपने विकास की प्रतीक्षा में यह स्थल खड़ा है। नागरिकों का कहना है कि शासन, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के विशेष ध्यान देने से इस स्थल का विकास निश्चित तौर पर पूरा होगा।

खिंडसी है आकर्षण का केंद्र

प्राकृतिक वनों में सटे इस स्थल पर जिन पहाड़ों ने अपनी छाप छोडी है वह एक ओर आकर्षित करती है। पहाड़ों के बीच एक खंड है जिसे खिंड़सी कहा जाता है, खिंड़सी लगभग एक से डेढ किमी. लंबी है, इस खिड़सी में मध्य प्रदेश का पानी महाराष्ट्र में आता है और यहीं से बहाव होकर कालीसराड़ बांध में पहुंचता है। खिंड़सी के किनारे 2 गुफा है और मध्य में बारह माह पानी का बहाव रहता है। यहां स्थित गुफाओं की ओर जाने के लिए लकड़ियां रखी है, इसके उपर से गुजर के जाना पड़ता है।

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