173 साल पहले मुंबई से ठाणे के बीच दौड़ी थी पहली ट्रेन, 75 साल की हुई मध्य रेल; जानिए गौरवशाली सफर की कहानी

Central Railway 75 Years: 16 अप्रैल 1853 को देश की पहली ट्रेन से शुरू हुआ मध्य रेल का सफर आज 75वें साल में प्रवेश कर चुका है। जानें इसके इतिहास, विरासत और आधुनिक बदलावों की पूरी कहानी।
Indian Railways First Train History
मध्य रेलवे, हेरिटेज पदयात्रासोर्स- नवभारत
Published on: 
Updated on: 

Highlights

  • 5 नवंबर 1951 को हुआ था मध्य रेल का औपचारिक गठन।

  • भारत की पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच चली थी।

  • मध्य रेल के पांच मंडलों में 4,384.92 किलोमीटर का रेल नेटवर्क और 492 स्टेशन हैं।

  • वर्ष 2023 तक उपनगरीय सेवाओं की संख्या बढ़कर 1,860 हो गई थी।

Indian Railways First Train History: भारतीय रेलवे के प्रमुख जोन के रूप में मध्य रेल का गौरवशाली सफर जरा हटकर है। देश की स्वतंत्रता के बाद 5 नवंबर 1951 को मध्य रेल का गठन हुआ परंतु ग्रेट इंडियन पेनिनसुला (GIP) रेलवे की उत्तराधिकारी मध्य रेल का इतिहास भारतीय रेल की शुरुआत से जुड़ा हुआ है। वैसे देश में पहली यात्री ट्रेन के साथ ही मध्य रेल की शुरुआत हो गई थी।

16 अप्रैल 1853 को चली थी देश की पहली यात्री ट्रेन

भारत में रेल परिवहन का ऐतिहासिक आगाज 16 अप्रैल 1853 को हुआ था। इसी दिन बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) से ठाणे के बीच 33 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए एशिया की पहली यात्री ट्रेन दौड़ी थी। इस ऐतिहासिक सफर ने देश में रेल परिवहन के एक नए युग की शुरुआत की।

इसके बाद GIP रेलवे ने अपने नेटवर्क का विस्तार करते हुए देश के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रेल संपर्क से जोड़ा। 5 नवंबर 1951 को GIP रेलवे का निजाम स्टेट रेलवे, सिंधिया स्टेट रेलवे और धौलपुर स्टेट रेलवे के साथ विलय कर मध्य रेल का गठन किया गया।

वर्तमान में मध्य रेल मुंबई, भुसावल, नागपुर, सोलापुर और पुणे सहित पांच मंडलों के माध्यम से सेवाएं संचालित करती है। इसका नेटवर्क महाराष्ट्र के अलावा मध्य प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों तक फैला है। मध्य रेल के अंतर्गत कुल 4,384.92 किलोमीटर मार्ग और 492 स्टेशन हैं।

हेरिटेज वाक का आयोजन

महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली मध्य रेल की स्थापना के 75 गौरवशाली वर्ष पूरे होने पर गुरुवार को मुंबई के प्रतिष्ठित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) स्थित हेरिटेज भवन में विशेष हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया।

मध्य रेल के महाप्रबंधक राजीव श्रीवास्तव ने इस हेरिटेज वॉक का नेतृत्व किया। कार्यक्रम के माध्यम से मध्य रेल की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य कला और देश के रेल परिवहन के विकास में उसके योगदान को याद किया गया।

Indian Railways First Train History
मध्य रेलवे, हेरिटेज पदयात्रासोर्स- नवभारत

मुंबई की लाइफलाइन से आधुनिक रेल सेवाओं तक

मुंबई की उपनगरीय रेल सेवाएं मध्य रेल की सबसे बड़ी पहचान हैं। प्रतिदिन लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने वाली इन सेवाओं का पिछले सात दशकों में व्यापक विस्तार हुआ है।

वर्ष 1951 में उपनगरीय सेवाओं की संख्या 519 थी, जो वर्ष 2023 में बढ़कर 1,860 हो गई। इनमें मुंबई की 1,820 और पुणे की 40 सेवाएं शामिल हैं। वर्तमान में मुख्य लाइन, हार्बर, ट्रांस-हार्बर और उरण लाइन के साथ पुणे-लोनावला मार्ग पर भी उपनगरीय सेवाएं संचालित होती हैं।

9, 12 और 15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों के साथ एसी लोकल सेवाएं भी यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। देश में सबसे ज्यादा ट्रेन सेवाओं का संचालन अकेले मध्य रेल का मुंबई मंडल करता है।

Indian Railways First Train History
महामंडलेश्वर इंद्रदेव महाराज पर यौन शोषण का केस दर्ज, अखाड़ा परिषद बोला- जांच रिपोर्ट आते ही होगी कार्रवाई

कई प्रतिष्ठित ट्रेनों का संचालन

भारतीय रेल की सबसे पुरानी व प्रतिष्ठित ट्रेनों में डेक्कन क्वीन, पंजाब मेल, गीतांजलि एक्सप्रेस और पुष्पक एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का संचालन मध्य रेल से जुड़ा है। वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के माध्यम से यात्री सेवाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य रेल ने 103.58 किलोमीटर नई और दोहरी रेल लाइनें चालू कीं। इसमें 71.84 किलोमीटर दोहरीकरण और 31.74 किलोमीटर नई रेल लाइनें शामिल हैं। पिछले पांच वर्षों में कुल 1,157.15 किलोमीटर रेल लाइनें चालू की गई हैं।

माल परिवहन के क्षेत्र में भी मध्य रेल का योगदान महत्वपूर्ण है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेलवे ने 8,296 करोड़ रुपये का प्रारंभिक माल लदान राजस्व दर्ज किया। कोयला, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, खाद्यान्न और कंटेनर परिवहन में इसकी अहम भूमिका रही है।

Indian Railways First Train History
Ashok Kharat Money Laundering Case: 50 करोड़ के लेन-देन का खुलासा, ढोंगी तांत्रिक पर ED की बड़ी कार्रवाई

संरक्षा और आधुनिक तकनीक पर विशेष जोर

यात्रियों की सुरक्षा के लिए कवच प्रणाली, आधुनिक सिग्नलिंग, ट्रैक रखरखाव और तकनीकी सुधारों पर काम किया जा रहा है। स्टेशनों के पुनर्विकास, लिफ्ट, एस्केलेटर, डिजिटल टिकटिंग और यात्री सुविधाओं के विस्तार को भी प्राथमिकता दी जा रही है।