शशिकरण देवस्थान के विकास की मांग तेज, भक्तों ने पर्यटन स्थल का दर्जा देने की उठाई आवाज

Shashikaran Devsthan: सड़क अर्जुनी स्थित ऐतिहासिक शशिकरण देवस्थान के विकास, पर्यटन स्थल का दर्जा और मूलभूत सुविधाओं की मांग तेज हो गई है।
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Tribal Religious Site (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Shashikaran Temple: मुंबई-कोलकाता नेशनल हाईवे क्र. 53 के पास मौजूद जागृत शशिकरण देवस्थान को आदिवासी समुदाय का श्रध्दास्थान माना जाता है। हालांकि इस पवित्र जगह की देखभाल योगीराज धूनीवाले बाबा सेवा ट्रस्ट करता है, लेकिन ट्रस्ट के अधिकारियों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने आज तक देवस्थान के पूरे विकास पर ध्यान नहीं दिया है।

इस देवस्थान के आसपास जागृत चंडिका माता, योगीराज धूनीवाले बाबा, रानी माता, शिव पहाड़ी पर शंकर मंदिर, भस्मडोह, शशिकरण बाबा और गुरु बाबा जैसे कई श्रध्दा स्थान है। जिससे यह जगह धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अहम मानी जाती है। ट्रस्ट के अनुसार योगीराज भालेवाले बाबा 1969 में इस मंदिर में आए थे।

ऐतिहासिक शशिकरण देवस्थान उपेक्षा का शिकार

घने जंगल में रहकर उन्होंने मंदिर की सेवा की और बिजली और पीने के पानी की सुविधा दी। बाद में, 2008 में उनका निधन हो गया और योगीराज धूनीवाले बाबा मठ में उनकी समाधि बनाई गई। विशेष बात यह है कि इस मंदिर से कुछ ही किलोमीटर दूर कई वर्तमान और पूर्व विधायक, मंत्री और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि रहते हैं, फिर भी हजारों साल के इतिहास वाले इस मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए कोई ठोस योजना लागू नहीं की गई है।

इस वजह से भक्तों में नाराजगी देखी जा रही है। नवरात्रि पर जलता है अखंड ज्योत। यहां हर सोमवार और बुधवार को बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। महाशिवरात्रि के मौके पर तीन दिन का धार्मिक उत्सव, नवरात्रि में नौ दिन की अखंड ज्योत और देवदशहरा के मौके पर एक बड़ी यात्रा होती है।

श्रद्धालुओं ने सरकार से की कायाकल्प की मांग

साल भर लाखों भक्त अपनी मन्नतें पूरी करने, पिकनिक मनाने और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए यहां आते हैं। योगीराज धुनीवाले बाबा सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश डुंभरे ने कहा कि चुनाव के समय कई जनप्रतिनिधि मंदिर आते हैं, लेकिन चुने जाने के बाद कोई भी मंदिर के विकास पर ध्यान नहीं देता।

इस वजह से इस ऐतिहासिक मंदिर को बहुत नुकसान हो रहा है। पर्यटन स्थल का दर्जा दें कोवे। इस बीच, ट्रस्ट के सचिव देवीदास कोवे ने मांग की है कि मंदिर को तुरंत पर्यटन स्थल का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर यह मंदिर, जो आदिवासी समुदाय का श्रध्दास्थल पूजनीय देवता है, को पर्यटन स्थल का दर्जा मिलता है, तो इससे इलाके के सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

शशिकरण देवस्थान के सर्वांगीण विकास, मुलभूत सुविधाओं और पर्यटन विकास का दर्जा दिलाने के लिए सरकार और जनप्रतिनिधियों से तुरंत पहल करने की मांग अब भक्तों और ट्रस्ट के सुखदेव ठाकुर, राहुल वनवे, राकेश नंदागावली, सौरभ बडोले, सुरेश बोरकर, दुदीश्वर लांजेवार, लालसिंह चंदेल, चंद्रमुनी बंसोड़ की तरफ से जोर पकड़ रही है।