तिरोड़ा विद्युत परियोजना से रायपुर तक हाईटेंशन लाइन बिछाने की तैयारी।
परियोजना के लिए करीब 5,300 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित।
गोंदिया तहसील के डाकनी, पांगडी और किंडगीपार समेत 19 गांवों से गुजरेगी लाइन।
नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन भी परियोजना की चपेट में आएंगे।
किसानों और पर्यावरण प्रेमियों ने बायपास मार्ग अपनाने की मांग की।
Gondia Navegaon Nagzira Tiger Reserve 5300 Trees Cutting: तिरोड़ा विद्युत परियोजना से रायपुर तक हाईटेंशन लाइन बिछाने के लिए करीब 5,300 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। यह लाइन नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन से होकर गुजरेगी। किसानों और पर्यावरण प्रेमियों ने वन्यजीवों के आवास को नुकसान की आशंका जताते हुए बायपास मार्ग अपनाने की मांग की है।
गोंदिया, एक ओर कर्जत-भीमाशंकर क्षेत्र में विद्युत परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर आंदोलन जारी है, वहीं अब रायपुर-गोंदिया के बीच हाईटेंशन विद्युत लाइन बिछाने की तैयारी ने पर्यावरण संबंधी चिंता बढ़ा दी है। इस परियोजना के लिए करीब 5,300 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। खास बात यह है कि विद्युत लाइन नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन से होकर गुजरेगी।
इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। किसानों और पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों की कटाई तथा वन क्षेत्र से लाइन ले जाने का विरोध करते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तिरोड़ा विद्युत परियोजना से रायपुर तक हाईटेंशन विद्युत लाइन का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना को शासन की मंजूरी मिल चुकी है। गोंदिया तहसील के डाकनी, पांगडी, किंडगीपार सहित आसपास के कुल 19 गांवों से यह लाइन गुजरेगी। इसके कुछ हिस्से नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्र से होकर गुजरेंगे।
परियोजना के लिए आधिकारिक तौर पर 5,300 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित की गई है। परियोजना का सर्वेक्षण भी पूरा हो चुका है।
जानकारी के अनुसार, नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और राज्य वन्यजीव बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है। अब अंतिम अनुमति के लिए प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण मंडल के पास भेजा गया है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने की तैयारी है।
नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। ऐसे में कोर और बफर क्षेत्र से हाईटेंशन लाइन गुजरने तथा बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से वन्यजीवों के आवास और पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि वन क्षेत्र को परियोजना से बाहर रखा जाए और विद्युत लाइन के लिए बायपास मार्ग अपनाया जाए। उनका कहना है कि वैकल्पिक रास्ते से निर्माण करने पर जंगल और वन्यजीवों को होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।
पर्यावरण प्रेमी सावन बहेकार ने कहा कि हाईटेंशन विद्युत लाइन के निर्माण का विरोध नहीं है, लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई स्वीकार्य नहीं है। कोर और बफर क्षेत्र से लाइन ले जाने के बजाय बायपास मार्ग अपनाकर इन क्षेत्रों को परियोजना से बाहर रखा जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर तीव्र आंदोलन किया जाएगा।