Gondia National Health Mission: गोंदिया जिले में कोरोना काल में जान की परवाह किए बगैर शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत संविदा कर्मी अपने अस्तित्व की लड़ाई में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि समायोजन को लेकर फैसला ले लिया गया है, लेकिन हकीकत में हजारों कर्मचारियों का समायोजन और मार्च माह से बकाया वेतन अभी भी लंबित है।
इससे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कड़ी नाराजगी जता रहे हैं। एनएचएम कर्मचारी पिछले दो साल से समायोजन का इंतजार कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिले में करीब 800 और राज्य में 4,500 से ज्यादा दस साल से अधिक सेवा वाले कर्मचारियों को समायोजित करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन, वाहन चालक और परिचारकों के अलावा अन्य हजारों कर्मचारियों को अभी भी न्याय नहीं मिला है।
मार्च 2026 से कई कर्मचारियों का वेतन बकाया है और कर्मचारियों को घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा, कर्ज की किस्तें और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। इन कर्मचारियों द्वारा माता व शिशु मृत्यु दर की रोकथाम, टीकाकरण, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं, ऑनलाइन डेटा प्रविष्टि, रिपोर्ट प्रस्तुत करना और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड का कार्य किया जा रहा है।
कर्मचारी संघों ने मांग की है कि समायोजन प्रक्रिया तुरंत पूरी की जाए, बकाया भुगतान तुरंत किया जाए और एनएचएम कर्मचारियों को स्थायी सुरक्षा दी जाए। अन्यथा राज्य भर में तीव्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
यह भी पढ़ें:-गोंदिया: तिरोड़ा डाकघर में BSNL नेटवर्क ठप, 2 दिन से ऑनलाइन सेवाएं बंद; पैसों के लेन-देन के लिए भटक रहे ग्राहक
समायोजन के इंतजार में कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्ति के कगार पर हैं तो कुछ ने परेशान होकर नौकरी छोड़ने की खबर है। कर्मचारी संघों का आरोप है कि सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था का कुशलतापूर्वक प्रबंधन कर रहे कर्मचारियों के भविष्य की अनदेखी की है।