Goregaon tehsil 
गोंदिया

दो विधायकों के बावजूद पिछड़ा गोरेगांव, विकास कार्य ठप, किसान परेशान

Gondia Rural Problem: गोंदिया के गोरेगांव तहसील में सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की गंभीर समस्याएं जस की तस बनी हुई है। दो विधायकों के बावजूद विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ी दिखाई दे रही है।

आंचल लोखंडे

Goregaon Tehsil Development Issues: गोरेगांव तहसील जो तिरोड़ा व अर्जुनी मोरगांव दो विधानसभा क्षेत्रों में विभाजित है, विडंबना यह है कि दो-दो विधायकों का प्रतिनिधित्व मिलने के बावजूद विकास के मामले में लगातार पिछड़ती जा रही है। सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों में तहसील के अधिकांश गांव वर्षों से गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। तहसील की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है, लेकिन सिंचाई सुविधाओं के अभाव में किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

शासन द्वारा बनाए गए कलपाधरी और कटंगी मध्यम प्रकल्प किसानों के लिए उम्मीद की किरण थे, लेकिन वे परियोजनाएं अब केवल नाम मात्र की रह गई हैं। कलपाथरी प्रकल्प से केवल मोहाड़ी, कमरगांव और बबई के किसानों को आंशिक लाभ मिल रहा है। देऊटोला, म्हसगांव, बोटे, झांजिया और दवडीपार जैसे गांव अब भी सिंचाई से वंचित हैं। इसी तरह, कटंगी प्रकल्प का लाभ भी सीमित क्षेत्रों तक ही सिमट गया है। कटंगी, पुरगांव और सिलेगांव को कुछ फायदा मिल रहा है, जबकि चंद्रपुरटोली, हिरडामाली, हलबीटोला और गोरेगांव शहर के किसान आज भी इंतजार कर रहे हैं। करोड़ों रु। खर्च कर बनाई गई नहरें खेतों तक पानी पहुंचाने में विफल रही हैं, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।

जनप्रतिनिधियों पर उठ रहे सवाल

इन सभी समस्याओं के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए जाने से आम जनता में नाराजगी है। वर्षों से लंबित समस्याओं पर ध्यान न देने से विकास की रफ्तार पूरी तरह थम गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति

तहसील में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल भी बेहद खराब है। सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों और आवश्यक सुविधाओं की भारी कमी है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए गोंदिया रेफर करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं भी पर्याप्त नहीं हैं।

शिक्षा व्यवस्था संकट में

शिक्षा क्षेत्र में भी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिप स्कूली में शिक्षकों की कमी है। कई स्कूल जर्जर इमारतों में संचालित हो रहे हैं, जहां छात्र खातरे के साए में पढ़ाई कर रहे हैं, नए भवनों के प्रस्ताव जिप में लंबित पड़े है। डिजिटल शिक्षा और तकनीकी संसाधनों की भी भारी कमी है। उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिए छात्रों को गोंदिया और नागपुर जैसे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

रोजगार के अवसरों का अभाव

तहसील में रोजगार सृजन की स्थिति भी चिंताजनक है। हिरडामाली में स्थापित महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (MIDC) का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार देना था, लेकिन यह परियोजना भी प्रभावी नहीं हो पाई है। शिक्षित युवा रोजगार के लिए अन्य शहरों और राज्यों की ओर पलायन कर रहे है। तिरोड़ा स्थित अदानी पावर प्लांट में भी स्थानीय युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। हजारों युवा आज भी बेरोजगारी से जूझ रहे है और धरिवार से दूर रहने को मजबूर है। गोरेगांव तहसील में दो विधायकों का प्रतिनिधित्व होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर चिंता का विषय है। यदि जल्द ही सिंचाई, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में ठोस पहल नहीं की गई, तो क्षेत्र का विकास और अधिक प्रभावित हो सकता है।

Explainer: क्या वाकई ग्रीन हैं ग्रीन क्रैकर्स, प्रदूषण, सेहत और जेब पर कितना असर? आसान भाषा में समझें

ओडिशा सरकार का शिक्षकों को बड़ा तोहफा, प्रभारी प्रधानाचार्यों को हर महीने मिलेगा 10 हजार रुपये तक भत्ता

Festival Business: दिवाली पर देश में 7 लाख करोड़ रुपये का कारोबार, कैट ने 15-18% वृद्धि की जताई उम्मीद

प्रधानमंत्री आवास योजना: नई लिस्ट में नाम आया या नहीं, ऑनलाइन आवेदन कैसे करें; जानें सारी डिटेल

Platform Ticket: दिवाली और छठ पर रेलवे स्टेशनों में एंट्री होगी मुश्किल? 15 नवंबर तक प्लेटफॉर्म टिकट पर रोक