Gondia Wild Elephant Attack प्रतीकात्मक तस्वीर 
गोंदिया

गोंदिया में 32 जंगली हाथियों का आतंक, झुंड के तांडव से स्थानीय किसानों में दहशत का माहौल

Gondia Elephant News: गोंदिया के अर्जुनी मोरगाव में 32 हाथियों के झुंड ने फसलों को किया बर्बाद। वन विभाग ड्रोन से रख रहा है नजर। किसानों में भारी दहशत।

अनिल सिंह

Gondia Wild Elephant Attack: महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में पिछले 15 दिनों से जंगली हाथियों के एक विशाल झुंड ने भारी आतंक मचा रखा है। गडचिरोली जिले से सीमा पार कर आए करीब 32 जंगली हाथियों के इस झुंड ने अर्जुनी मोरगाव तालुका के वडेगाव बंध्या और केशोरी क्षेत्रों में फसलों को तहस-नहस कर दिया है।

हाथियों के इस तांडव से स्थानीय किसानों में भारी दहशत का माहौल है और जान-माल के नुकसान का खतरा बना हुआ है।

ड्रोन कैमरों से हाथियों की निगरानी

वन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपनी पूरी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। हाथियों की सटीक लोकेशन और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। ड्रोन द्वारा ली गई तस्वीरों में हाथियों का यह बड़ा झुंड खेतों के बीच विचरण करता हुआ कैद हुआ है। वन विभाग की 'डेली मॉनिटरिंग टीम' 24 घंटे गश्त कर रही है ताकि हाथियों को मानवीय बस्तियों में घुसने से रोका जा सके।

मशालों और अलाव से सुरक्षा का प्रयास

हाथियों को गांवों से दूर रखने के लिए ग्रामीण और वन कर्मी पारंपरिक तरीकों का भी सहारा ले रहे हैं। रात के समय गांवों के चारों ओर मशालें और शेकोट्या (अलाव) जलाई जा रही हैं।

वन विभाग ने चेतावनी जारी की

वन विभाग ने चेतावनी जारी की है कि 'फायर सीजन' होने के बावजूद कर्मचारियों का मुख्य ध्यान हाथियों से होने वाली संभावित जनहानि को रोकना है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे रात के समय अकेले बाहर न निकलें और हाथी दिखने पर तुरंत अधिकारियों को सूचित करें।

मुआवजे और पंचनामे की प्रक्रिया शुरू

जंगली हाथियों के हमले में जिन किसानों की धान और अन्य फसलें बर्बाद हुई हैं, उनके लिए राहत की खबर है। वन विभाग ने नुकसान का आकलन करने के लिए पंचनामा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मुआवजा देने की कार्यवाही

प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा देने की कार्यवाही भी आगे बढ़ाई गई है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त जारी रहेगी जब तक कि हाथियों का झुंड वापस जंगल की गहराई में या पड़ोसी जिले की सीमा में नहीं चला जाता।

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