गोंदिया सारस पक्षी संरक्षण बैठक (सोर्सः सोशल मीडिया)
गोंदिया

गोंदिया में सारस संरक्षण के साथ प्राकृतिक खेती की अनूठी पहल, 100 एकड़ में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

Natural Farming In Gondia: गोंदिया जिले के आमगांव तहसील स्थित घाटटेमनी गांव में सारस पक्षियों के संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देश का पहला पथदर्शी प्रकल्प प्रस्तावित है।

आंचल लोखंडे

Highlights:

  • गोंदिया जिले में सारस पक्षियों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष परियोजना प्रस्तावित की गई है।

  • आमगांव तहसील के घाटटेमनी गांव में करीब 40 हेक्टेयर यानी 100 एकड़ कृषि क्षेत्र में सारस संरक्षण और प्राकृतिक खेती को एक साथ जोड़ने की योजना है।

  • इस परियोजना में 40 खातेदार किसानों की भागीदारी प्रस्तावित है। एक वर्ष के दौरान तीन फसल सत्रों में प्राकृतिक खेती के प्रयोग किए जाएंगे।

Gondia Saras Bird Conservation: गोंदिया जिले में सारस पक्षियों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा तथा पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मित्रा, जिला प्रशासन और गुजरात प्राकृतिक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के समन्वय से सारस पक्षियों के अधिवास क्षेत्र के किसानों के लिए 'सारस पक्षी संरक्षण व प्राकृतिक खेती' विषयक जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जिलाधिकारी कार्यालय स्थित जिला नियोजन समिति सभागृह में आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कार्यालय, मुंबई के वरिष्ठ कृषि सलाहकार डॉ. परसराम पाटिल ने मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी अभिजित घोरपडे, उपवनसंरक्षक पवन जोंग, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी व आत्मा के परियोजना संचालक निलेश कानवडे आदि उपस्थित थे।

आगामी दो वर्षों में राज्य के खेती का लक्ष्य

मुख्यमंत्री की संकल्पना 25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी दिशा में गोंदिया जिले में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस पहल के तहत आमगांव तहसील के घाटटेमनी गांव में सारस पक्षियों के प्राकृतिक आवास वाले लगभग 100 एकड़ कृषि क्षेत्र में सारस संरक्षण और प्राकृतिक खेती को एक साथ जोड़कर देश का पहला पथदर्शी प्रकल्प लागू करने की योजना बनाई गई है। इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, जैव विविधता के संरक्षण और सारस पक्षियों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा पर एकीकृत रूप से काम किया जाएगा।

सारस संरक्षण और जैव विविधता पर दिया जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत में जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी निलेश कानवडे ने जिले में सारस पक्षी संरक्षण और प्राकृतिक खेती के संदर्भ में प्रशिक्षण की आवश्यकता स्पष्ट की। डॉ. परसराम पाटिल ने सारस संरक्षण की पृष्ठभूमि, जैव विविधता के महत्व और प्राकृतिक खेती की भूमिका पर मार्गदर्शन किया।

प्रस्तावित परियोजना के संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय की टीम ने घाटटेमनी गांव का दौरा कर स्थानीय किसानों से चर्चा भी की। इस दौरान सारस पक्षियों के आवास वाले कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, प्राकृतिक खेती अपनाने की संभावनाओं, किसानों की अपेक्षाओं और परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की समिक्षा की।

घाटटेमनी और झिलमिली क्षेत्र का किया जाएगा अध्ययन

परियोजना की पूर्व तैयारी के तहत आमगांव तहसील के घाटटेमनी तथा गोंदिया तहसील के झिलमिली क्षेत्र में क्षेत्रीय दौरे की योजना बनाई गई थी। इस दौरान सारस पक्षियों के प्राकृतिक आवास, आर्द्रभूमि और प्राकृतिक खेती वाले क्षेत्रों का अध्ययन किया जाना था। इसका उद्देश्य स्थानीय कृषि पद्धतियों, सारस पक्षियों के आवास और जैव विविधता के बीच पारस्परिक संबंधों को समझना था।

40 हेक्टेयर में परियोजना

प्रस्तावित पथदर्शी परियोजना के तहत लगभग 40 हेक्टेयर यानी करीब 100 एकड़ क्षेत्र में 40 खातेदार किसानों की भागीदारी से एक वर्ष के दौरान तीन फसल सत्रों में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने की योजना है।

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