गोंदिया ग्रामीण सड़कें- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया) 
गोंदिया

सरकार क्या उपलब्ध कराएगी 150 करोड़ का फंड, गोंदिया की गढ्ढ़ो भरी सड़को को देनी होगी संजीवनी

Gondia Road Repair: गोंदिया जिले की करीब 500 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। मरम्मत के लिए लगभग ₹150 करोड़ की जरूरत है, लेकिन पर्याप्त बजट नहीं मिला।

आंचल लोखंडे

Damaged Rural Roads Gondia: गोंदिया जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें बदहाल होती जा रही हैं। बरसात के मौसम और संबंधित विभाग की अनदेखी के कारण जगह-जगह बने गड्डों ने ग्रामीणों, विद्यार्थियों और वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालत यह है कि लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। जिला परिषद निर्माण विभाग के अनुसार जिले में करीब 500 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि उनकी मरम्मत के लिए लगभग 150 करोड़ की आवश्यकता है। पर्याप्त बजट नहीं मिलने से मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, जिला परिषद निर्माण विभाग के अधीन जिले में करीब 5,500 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें हैं। इनमें से लगभग 500 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। विभाग ने सड़कों की मरम्मत की तैयारी तो कर ली है, लेकिन निधि के अभाव में अधिकांश कार्य लंबित हैं। जिला नियोजन समिति से सीमित राशि मिलने के कारण फिलहाल केवल अस्थायी मरम्मत कर स्थिति संभालने का प्रयास किया जा रहा है। कई स्थानों पर छोटे-मोटे सड़क हादसे भी हो चुके हैं। वहीं लगातार गड्डों से गुजरने के कारण वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इन मार्गों की हालत सबसे खराब

जिले में गोरेगांव-आमगांव, गोरेगांव-तिरोड़ा, गोरेगांव-ठाणा, गोरेगांव-कोहमारा, म्हसगांव-गोरेगांव, गणखैरा-सुरगांव, पदमपुर-सावंगी, आमगांव-कुंभारटोली, रिसामा-गोंदिया, किडगीपार-शिवनी, किडगीपार जवरी, काशीघाट-चिखली, काशीघाट-इंदोरा, तिरोड़ा धांदरी, बेरडीपार-सुकली। पुजारीटोला-कवलेवाडा, डोंगरगांव-सुकली तथा माल्ही-वडेगांव सहित कई प्रमुख ग्रामीण मार्गों की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है।

शासन ने निधि मिलते ही सुधार का काम होगा शुरू

जिप गोंदिया के कार्यकारी अभियंता, निर्माण विभाग प्रकाश ताकसांडे ने कहा कि विभाग के अधीन लगभग 5,500 किलोमीटर सड़कें हैं, जिनमें से करीब 500 किलोमीटर सड़कें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है। सड़कों की मरम्मत के लिए कम से कम 150 करोड़ की आवश्यकता है और जैसे ही पर्याप्त निधि उपलब्ध होगी, मरम्मत कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।

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