Wild Animals :गोंदिया जिले (सोर्सः सोशल मीडिया) 
गोंदिया

रबी पर जंगली जानवरों की नजर, तारबाड़ की मांग, मजदूर खेत जाने से कर रहे इनकार

Wild Animals: गोंदिया जिले में रबी फसल की बुआई के समय जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने से किसान चिंतित हैं और उन्होंने खेतों में 8-10 फीट ऊंची तारबाड़ लगाने व 100% अनुदान की मांग की है।

आंचल लोखंडे

Gondia farmers: गोंदिया जिले में फिलहाल रबी मौसम के लिए किसानों द्वारा खेतों में धान की बुआई और रोपाई की जा रही है। हालांकि, जंगल से सटे क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ और जंगली सुअरों की हलचल के कारण खेत परिसरों में दहशत का माहौल बना हुआ है। इस भय के चलते कई खेत मजदूर खेतों में काम करने से इंकार कर रहे हैं, जिससे किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। खेती पर निर्भर किसानों की सालभर की योजना प्रभावित हो रही है और जंगल से सटे खेतों वाले किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। किसानों ने वन विभाग से प्रभावी उपाय योजना करने की मांग की है।

फिलहाल खरीफ सीजन के लिए धान की बुआई और रोपाई का कार्य जारी है, जिसमें किसान और खेत मजदूर सक्रिय हैं। लेकिन रात के समय बोए गए धान की बीजाई को जंगली सुअर नुकसान पहुंचा रहे हैं। मौसम अनुकूल होने से बुआई कार्य में तेजी आई है और किसानों ने अच्छे उत्पादन की उम्मीद लगाई है।

वनक्षेत्र से सटे खेतों की सुरक्षा करें

किसान बड़ी मेहनत से खेतों में फसल उगाते हैं, लेकिन हर साल उनकी फसल जंगली जानवरों से प्रभावित होती है। इससे किसान वर्ग त्रस्त हो जाता है। किसानों ने खेतों में तार फेंसिंग कराने पर सब्सिडी देने की मांग की है। जंगल से सटे क्षेत्रों में जानवरों से फसल को नुकसान होने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। जिले में वनक्षेत्र से सटे खेतों को सुरक्षित करना आवश्यक है। किसानों ने खेतों में 8 से 10 फीट ऊंची तारबाड़ लगाने की मांग की है। जिले की देवरी तहसील नवेगांवबांध राष्ट्रीय उद्यान और नवेगांवबांध वन परिक्षेत्र से सटी हुई है।

खेतों में घुसकर फसल रौंद देते हैं जानवर

जंगली जानवर खेतों में घुसकर उगती फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है। हिंसक जानवरों के मानव और पशुधन पर हमलों की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

कार्रवाई नहीं होने से किसानों में रोष

अब तक इस दिशा में कोई ठोस उपाय योजना लागू नहीं की गई है। किसानों ने संयुक्त वन व्यवस्थापन समिति और वन परिक्षेत्र अधिकारी से तारबाड़ लगाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि 100 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाए, तो काफी हद तक नुकसान रोका जा सकता है। लेकिन मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होने से किसानों में रोष व्याप्त है।

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