गोंदिया नगर परिषद (फाइल फोटो) 
गोंदिया

बहुमत किसी के पास नहीं, पर दावे सबके! 15 जनवरी को 'किंगमेकर' निर्दलीय तय करेंगे गोंदिया का उपाध्यक्ष

Gondia Nagar Parishad: 15 जनवरी को उपाध्यक्ष और स्वीकृत सदस्यों का चुनाव। 18 पार्षदों वाली भाजपा और 14 वाली कांग्रेस के बीच खींचतान। निर्दलीय बनेंगे किंगमेकर।

प्रिया जैस

Gondia Vice President Election: गोंदिया नगर परिषद के उपाध्यक्ष व स्वीकृत पार्षद पदों के लिए राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ऐसे संकेत हैं कि यह चुनाव इस बात से ज्यादा अहम होगा कि किसे कौन सा पद मिलेगा। गोंदिया नगर परिषद के लिए 2 और 20 दिसंबर को मतदान हुआ था और 21 दिसंबर को मतगणना हुई थी। एक नगराध्यक्ष व 22 प्रभागों से 44 पार्षदों सहित 45 सीटों के लिए आम चुनाव हुए थे। कांग्रेस के सचिन शेडे नगराध्यक्ष चुने गए।

उल्लेखनीय है कि मतदाताओं ने गोंदिया नगर परिषद में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं दिया। भाजपा के 18, कांग्रेस के 14, राकांपा के पांच, शिवसेना (उबाठा) के दो, बसपा के दो और तीन निर्दलीय पार्षद हैं। अब पहली सभा 15 जनवरी को हो रही है। बताया जा रहा है कि बैठक में उपाध्यक्ष और विषय समितियों के चुनाव के साथ-साथ स्वीकृत सदस्यों और उपाध्यक्ष को कौन सी समितियां दी जाएंगी और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।

नगराध्यक्ष सभा के पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे और मुख्याधिकारी संदीप बोरकर सचिव के रूप में कार्य करेंगे। विशेष बात यह है कि उपाध्यक्ष व स्वीकृत सदस्य पद के चुनाव में मत देने का अधिकार नगराध्यक्ष के पास होता है, इसलिए 44 पार्षदों में से कौन किस तरह से बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाएगा।

स्वीकृत सदस्यों का चुनाव संख्या बल पर

पांच स्वीकृत सदस्यों का चुनाव संख्या बल के आधार पर होना है। पार्टियों की संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस से दो-दो और राकां से एक पार्षद हो सकता है। क्योंकि नगर परिषद चुनाव में चुने गए अलग-अलग पार्टियों के उम्मीदवारों ने एक-दूसरे के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ा था, इसलिए नगराध्यक्ष और पार्षद पद के चुनाव में पार्टी के अंदर की खींचतान, टिकट बंटवारे में रुकावटें, साथ ही गुटबाजी और बंटवारे की राजनीति बड़े पैमाने पर देखी गई।

यह साफ नहीं है कि उपाध्यक्ष और स्वीकृत पार्षद के पद के चुनाव में कौन किसके साथ गठबंधन करेगा। फिलहाल, इस बारे में किसी ने अपनी भूमिका साफ नहीं की है। पार्टी बनाने के मामले में राजनीतिक घटनाक्रम ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है, जिसमें तीन चुने गए निर्दलीय और बसपा और शिवसेना (उबाठा) के दो-दो पार्षद किसकी तरफ झुके हैं और कौन किसके साथ गठबंधन करेगा।

नेहा बोरा ने CJP से किया किनारा, हाई कोर्ट में कहा- तिरंगा फहराने के लिए अनुमति जरूरी नहीं; कब आएगा फैसला?

सोनम का झलका दर्द, सरकार पर लगाया वादा खिलाफी का गंभीर आरोप; कहा चीन लद्दाख को नहीं मानता भारत का हिस्सा

रेहान वाड्रा की 74 तस्वीरें प्रदर्शनी से क्यों हटाई गईं? बीकानेर हाउस ने बताई वजह

अमित शाह ने केजरीवाल को ललकारा, 2029 तक साफ यमुना का बनाया लक्ष्य, बोले- पंजाब से उखाड़ फेकेंगे AAP की सरकार

त्रिपुरा में युवक के साथ बदतमीजी पर बवाल, स्टूडेंट्स फोरम ने की FIR की मांग, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ VIDEO