Ladki Behna Yojana Women Pension Eligibility Concern: गोंदिया जिले में मुख्यमंत्री मेरी लाडकी बहन योजना की 3.14 लाख महिलाएं पात्र हैं। योजना में 65 वर्ष तक की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए मिलते हैं। 65 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद नाम योजना से स्वतः हट जाता है, जबकि वैकल्पिक पेंशन योजनाओं में अलग पात्रता शर्तें लागू हैं।
महाराष्ट्र सरकार की मुख्यमंत्री मेरी लाडकी बहन योजना के तहत 21 से 65 वर्ष आयु वर्ग की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि कई महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहारे का माध्यम बनी हुई है।
हालांकि, महिला की उम्र 65 वर्ष पूरी होने के बाद वह योजना की पात्रता से बाहर हो जाती है। ऐसे में उसके खाते में आने वाली 1,500 रुपए की मासिक सहायता बंद होने की स्थिति बनती है। इससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के सामने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गोंदिया के जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तुषार पौनीकर के अनुसार, योजना के निर्धारित मानदंडों के कारण जिले में कई महिलाएं अपात्र हुई हैं। 65 वर्ष की आयु पूरी करने वाली लाभार्थी महिलाओं के नाम योजना से स्वतः हट जाएंगे। उन्होंने बताया कि योजना का संपूर्ण संचालन राज्य स्तर से किया जा रहा है और 65 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं का अलग रिकॉर्ड जिला स्तर पर उपलब्ध नहीं है।
अधिकारी के अनुसार, अपात्र हुई महिलाओं से किसी भी प्रकार की राशि की वसूली नहीं की जाएगी। नए लाभार्थियों के पंजीकरण को लेकर भी फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
65 वर्ष के बाद महिलाओं के लिए श्रावणबाल सेवा राज्य निवृत्तिवेतन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना जैसे विकल्प मौजूद हैं। विधवा महिलाओं के लिए भी अलग पेंशन योजनाएं हैं। लेकिन इन योजनाओं में गरीबी रेखा, आय सीमा और अन्य पात्रता शर्तें लागू होती हैं।
यानी लाडकी बहन योजनासे उम्र के आधार पर बाहर होने वाली महिला स्वतः किसी दूसरी पेंशन योजना की लाभार्थी नहीं बन जाती। उसे संबंधित योजना की पात्रता पूरी करनी होगी। ऐसे में जरूरतमंद महिलाओं के लिए 65 वर्ष के बाद आर्थिक सहायता का संक्रमण कैसे होगा, यह अहम सवाल है।
गोंदिया जिले में लाडकी बहन योजना के लिए 3,14,017 महिलाएं पात्र हैं। जिले में कुल 3,64,245 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 26,927 आवेदन अपात्र पाए जाने के बाद रद्द किए गए।
हालांकि, इन पात्र लाभार्थियों में कितनी महिलाएं वर्तमान में 65 वर्ष की उम्र के करीब हैं और आने वाले समय में कितनी महिलाएं आयु सीमा पार कर योजना से बाहर होंगी, इसका स्वतंत्र अधिकृत आंकड़ा जिला स्तर पर उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि 65 वर्ष के बाद नियमित आर्थिक सहायता को लेकर महिलाओं की चिंता बनी हुई है।