गोंदिया

गोंदिया में अक्षय तृतीया से खरीफ सीजन का आगाज; 1.95 लाख हेक्टेयर में होगी धान की फसल, तैयारियों में जुटे किसान

Gondia News: गोंदिया जिले में अक्षय तृतीया के साथ खरीफ सीजन की शुरुआत हो गई है। इस वर्ष 1.95 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य है, जिसके लिए किसानों ने खेतों की तैयारी शुरू कर दी है।

रूपम सिंह

Gondia Kharif Season Paddy News: गोंदिया जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त से होती है, जो साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक है। जिले में 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फसलें उगाई जाती हैं। इसमें से 1 लाख 95 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होती है। खरीफ सीजन के खेती के काम की तैयारी जोरों पर शुरू हो गई है। क्योंकि इस दिन को अक्षय माना जाता है, जो सफलता लाता है, इसलिए किसानों ने अपने खेती के काम के लिए शुभ मुहूर्त तय कर लिया है और अब जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जुताई और मेड की मरम्मत, गोबर फैलाने का काम जोर पकड़ेगा।

गोंदिया जिला एक प्रमुख चावल उत्पादक जिले के रूप में जाना जाता है। बड़ी मात्रा में धान उत्पादन के कारण गोंदिया को धान का कटोरा कहा जाता है। अक्षय तृतीया का त्योहार 19 अप्रैल को मनाया गया। हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक इस त्योहार का बहुत महत्व है। जिले में अक्षय तृतीया को पारंपरिक रूप से अक्ति या आखाजी के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इस दिन सुबह किसान अपने खेतों में जाते हैं और भूमिपूजन करते हैं, कई जगहों पर बैलों की मदद से खेतों की पहली जुजबी जुताई शुरू की जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में हलखाता कहा जाता है। इस वर्ष अच्छी फसल की आसकिसान धरती माता की पूजा कर नए सीजन में अच्छी फसल, पानी और प्रकृति के सहयोग की प्रार्थना कर रहे हैं। जिले में मुख्य रूप से खरीफ मौसम में धान की फसल की खेती की जाती है।

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा में खरीफ फसल बोने की योजना है। इसमें 1 लाख 95 हजार हेक्टेयर और उससे अधिक क्षेत्र में धान की खेती की योजना बनाई गई है। मानसून आने से पहले किसान खेत तैयार करने में जुट गए हैं। बीज की जांच करना, उर्वरकों का मिलान करना और नर्सरी रोपण के लिए तैयार करना अब प्राथमिकता दी जा रही है।

इसकी पूर्व योजना के तौर पर खेत की जुताई, खाद डालना, धुआं छिड़कना आदि शुरू किया जाएगा।कृषि सामग्री की खरीद की तैयारीशुभ मुहूर्त होने के कारण किसान अक्षय तृतीया के दिन नए बीज और कृषि उपकरण खरीदना पसंद करते हैं। जिसके अनुसार नई किस्मों, बीजों की योजना पहले से बनाई जाती है।

किसान मौसम का पूर्वानुमान लगाकर सही किस्मों का चयन कर रहे हैं और गुणवत्तापूर्ण उपज के लिए कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी लिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अक्षय तृतीया के दिन हवा की दिशा और तापमान से बारिश की भविष्यवाणी करने की परंपरा है। किसानों को उम्मीद है कि इस वर्ष मानसून समय पर आएगा।

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