Gondia Health Department: गोंदिया जिले के ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत जिले की सभी 8 तहसीलों में कुल 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 263 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। लेकिन डाक्टरों सहित स्वास्थ्य कर्मचारियों के अनेक पद रिक्त होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। फैल रही बीमारियां वर्तमान में जिले में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज जांच व उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। कई केंद्रों पर प्रतिदिन करीब 100 से 150 मरीजों की जांच की जा रही है। ऐसे में पर्याप्त चिकित्सक व कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने से उपस्थित कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। जिले के 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में 263 उपकेंद्र संचालित हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों व उपकेंद्रों में कई पद रिक्त हैं।
गोंदिया जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिजीत गोल्हार ने कहा कि गोंदिया जिले में 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 263 उपकेंद्र है। जहां डाक्टरों सहित कर्मचारियों के 399 पद रिक्त है। पद रिक्त होने के कारण डाक्टरों सहित कर्मचारियों पर दबाव बढ़ गया है। जिससे एक कर्मचारी को अन्य कर्मचारी का भी काम करना पड़ रहा है।
जिले के 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 263 उपकेंद्रों में डाक्टरों व कर्मचारियों के कुल 1 हजार 187 पद है। जिनमें से 399 पद रिक्त है। इन केंद्रों में प्रतिदिन 100 से 150 मरीज आते है। कर्मचारियों के रिक्त पदों के कारण डाक्टरों व कर्मचारियों पर दबाव बढ़ गया है। जिसका असर स्वास्थ्य सेवा पर पड़ रहा है।
गोंदिया जिला आदिवासी व दुर्गम क्षेत्रों के लिए भी जाना जाता है। इन क्षेत्रों के अनेक नागरिक खेती और मजदूरी पर निर्भर है, आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण निजी अस्पतालों में महंगा उपचार कराना उनके लिए मुश्किल है। ऐसे में ग्रामीण व आदिवासी नागरिकों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी अस्पताल व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही मुख्य आधार है।
लेकिन कई ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त डाक्टर, स्वास्थ्य कर्मचारी व आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। गंभीर स्थिति में मरीजों को दूर स्थित बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों से डाक्टरों व कर्मचारियों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होने की चात सामने आ रही है। वर्तमान में वायरल बुखार और मलेरिया का प्रकोप होने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का दबाव और बढ़ गया है।