गोंदिया सरकारी धान  (सोर्सः सोशल मीडिया)
गोंदिया

Gondia Paddy Procurement: 11 लाख क्विंटल धान अब भी गोदामों में, खरीफ खरीदी से पहले जगह का संकट

Gondia Government Paddy: गोंदिया में पिछले रबी सीजन का करीब 11 लाख क्विंटल सरकारी धान अब भी गोदामों में पड़ा है। उठाव और मिलिंग में देरी से आगामी खरीफ धान खरीदी के लिए जगह का संकट बढ़ा।

आंचल लोखंडे

Gondia Paddy Procurement Centres: गोंदिया जिला मार्केटिंग फेडरेशन ने पिछले रबी सीजन में सरकारी धान खरीदी केंद्रों से 34 लाख 24 हजार क्विंटल धान खरीदा था। इसमें से करीब 11 लाख क्विंटल धान अब भी सेवा सहकारी संस्थाओं के गोदामों में पड़ा है। खरीदी के चार महीने बाद भी धान का उठाव और मिलिंग पूरी नहीं होने से अब आगामी खरीफ सीजन की धान खरीदी को लेकर संस्थाओं के सामने जगह की समस्या खड़ी हो गई है।

शासन की ओर से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए जिला मार्केटिंग फेडरेशन और आदिवासी विकास महामंडल के माध्यम से खरीफ और रबी में धान खरीदा जाता है। पिछले सीजन में जिला मार्केटिंग फेडरेशन ने 194 केंद्रों से 34.24 लाख क्विंटल धान खरीदा था।

जगह उपलब्ध कराने की समस्या पैदा हो सकती है

खरीदी बंद हुए करीब चार महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में धान गोदामों में पड़ा है। धान की मिलिंग कराकर सीएमआर चावल शासन के पास जमा किया जाना अपेक्षित था। लेकिन उठाव और मिलिंग में देरी के कारण 11 लाख क्विंटल धान अब तक गोदामों में पड़ा है। अगले महीने खरीफ की धान खरीदी शुरू होने की संभावना है। ऐसे में समय पर धान का उठाव नहीं हुआ तो नई खरीदी के लिए जगह उपलब्ध कराने की समस्या पैदा हो सकती है। धान जितने लंबे समय तक गोदामों में पड़ा रहेगा, उतनी ही तूट बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

बोनस का अब भी इंतजार

पिछले खरीफ सीजन के धान उत्पादक किसानों को मिलने वाला बोनस भी अब तक घोषित नहीं हुआ है। आगामी खरीफ सीजन की खरीदी शुरू होने वाली है, जबकि सरकार की ओर से बोनस की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी जा रही है। जिले के करीब डेढ़ लाख पात्र किसान बोनस की घोषणा और भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सूखे व कीट प्रकोप का भी असर

हर वर्ष खरीफ सीजन में जिला मार्केटिंग फेडरेशन को करीब 40 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य दिया जाता है। लेकिन पिछले वर्ष से सरकार ने लक्ष्य एकमुश्त देने के बजाय चरणबद्ध तरीके से देने की प्रक्रिया शुरू की है। इस वर्ष सूखे की स्थिति और कीट रोगों से धान फसल को नुकसान हुआ है। इससे उत्पादन घटने की संभावना जताई जा रही है, जिसका असर सरकारी धान खरीदी पर भी पड़ सकता है।

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