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गोंदिया जिले की तिरोड़ा तहसील में बारिश की कमी के कारण बड़े क्षेत्र में खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है।
तिरोड़ा तहसील के 125 गांवों के किसानों को फसल नुकसान का सामना करना पड़ा है। इन गांवों में पंचनामे पूरे हो चुके हैं।
गोंदिया, सालेकसा, गोरेगांव, देवरी, आमगांव, सड़क अर्जुनी और अर्जुनी मोरगांव में नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
Crop Loss Panchnama Gondia: बारिश में लंबे अंतराल के कारण जिले में खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। धान उत्पादक किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तिरोड़ा तहसील में बारिश की कमी से करीब 20 हजार 400 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें प्रभावित हुई हैं। यहां 125 गांवों के 23 हजार 425 किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ा है।
प्रशासन ने इन गांवों में फसलों के नुकसान का पंचनामा पूरा कर लिया है। वहीं, गोंदिया सहित जिले की अन्य सात तहसीलों में पंचनामे युद्धस्तर पर जारी हैं। कृषि विभाग को उम्मीद है कि अगले चार दिनों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
धान का कटोरा कहे जाने वाले गोंदिया जिले में खेती का बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर है। इस खरीफ सीजन में बारिश के अनियमित वितरण ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने से खेतों में नमी कम हुई और धान की बढ़वार प्रभावित हुई।
पौधों में फुटवे कम निकलने तथा दाने भरने की प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका है। इससे उत्पादन घटने का डर किसानों को सता रहा है। तिरोड़ा तहसील में इस खरीफ सीजन के दौरान कुल 31,868.01 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रत्यक्ष बुआई की गई थी। लेकिन, बुआई के बाद बारिश में अंतराल आने से फसलों की स्थिति प्रभावित हुई।
करीब 20,400 हेक्टेयर क्षेत्र में 33 प्रश. से अधिक नुकसान होने की जानकारी पंचनामों में सामने आई है। इससे बड़ी संख्या में किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बारिश की कमी के साथ धान की फसल पर तना छेदक, तुडतुड़ा और करपा जैसे कीट व रोगों का प्रकोप भी किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है।
फसल को बचाने के लिए बार-बार कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ रहा है। बीज, खाद, मजदूरी और खेती की तैयारी पर पहले ही खर्च कर चुके किसानों पर अब दवाइयों का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। यदि उत्पादन में गिरावट आती है, तो किसानों के लिए खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
इसके साथ ही फसल कर्ज चुकाने की चिंता भी बढ़ रही है। ऐसे में प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता जल्द मिलने की उम्मीद है। तिरोड़ा के अलावा गोंदिया, सालेकसा, गोरेगांव, देवरी, आमगांव, सड़क अर्जुनी और अर्जुनी मोरगांव तहसीलों में भी बारिश के अंतराल से फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
प्रशासन प्रभावित क्षेत्र, किसानों की संख्या और फसलों की स्थिति का विवरण जुटा रहा है। पंचनामों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिले में नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इसके बाद संकलित रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और नियमानुसार सहायता के संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब किसानों की निगाहें अंतिम रिपोर्ट और शासन के निर्णय पर टिकी हैं।
खरीफ सीजन जिले के अनेक किसानों की आय का प्रमुख आधार है। बुआई से लेकर बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च करने के बाद बारिश की कमी से फसल प्रभावित होने के कारण किसानों का आर्थिक गणित बिगड़ने की आशंका है। किसान चाहते हैं कि नुकसान का सही आकलन कर पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार जल्द सहायता दी जाए। तिरोड़ा तहसील के 125 गांवों में पंचनामे पूरे हो चुके हैं, जबकि अन्य सात तहसीलों में सर्वेक्षण जारी है।
अंतिम रिपोर्ट और सहायता संबंधी सरकारी निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। धान की फसल पर तना छेदक, तुडतुड़ा और करपा जैसे कीटों व रोगों का असर होने से फसल की बढ़वार और दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। इन पर नियंत्रण के लिए किसानों को दवाइयों का छिड़काव करना पड़ रहा है। पहले से बढ़े कृषि खर्च के बीच यह अतिरिक्त बोझ किसानों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा रहा है।
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी नीलेश कानवडे ने कहा कि तिरोड़ा तहसील में पंचनामे युद्धस्तर पर पूरे किए गए हैं। जिले की अन्य सात तहसीलों में पंचनामे जारी है। अगले चार दिनों में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद इसे शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। आपदाग्रस्त किसानों को दिवाली से पहले 5 हजार रु. की सहायता देने पर शासन विचार कर रहा है। शेष सहायता चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी।