Gondia Social Welfare Department: अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति अथवा परिवार पर जातिगत कारणों से अत्याचार होने की स्थिति में पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सामाजिक न्याय विभाग की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके तहत गत वर्ष जिले में दर्ज मामलों में 29 पीड़ितों अथवा पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दी गई। इनमें प्रथम किस्त के रूप में 18 पीड़ितों को 23.125 लाख रु. जबकि दूसरी किस्त के रूप में 11 पीड़ितों को 18 लाख रु. की सहायता प्रदान की गई। वहीं, प्रथम किस्त के 5 और दूसरी किस्त के 12 मामले अब भी लंबित हैं।
इस आर्थिक सहायता में केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 प्रश हिस्सेदारी होती है। अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत 47 प्रकार के अपराधों की प्रकृति के अनुसार पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। अपराध की गंभीरता के अनुसार 85 हजार रु. से लेकर 8 लाख 25 हजार रु. तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
योजना के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने के बाद 25 प्रश, न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल होने पर 50 प्रश तथा आरोपी को निचली अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद शेष 25 प्रश राशि पीड़ित लाभार्थी को तत्काल उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। सामाजिक न्याय विभाग के सहायक आयुक्त किशोर भोयर के प्रयासों से गत वर्ष जिले के 29 पीड़ितों अथवा पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद प्रदान की गई। इसका उद्देश्य अत्याचार से प्रभावित परिवारों को सामाजिक व आर्थिक रूप से दोबारा खड़ा होने तथा सम्मानपूर्वक जीवन जीने में सहायता करना है।
अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को जातिगत कारणों से गाली-गलौज करना, मारपीट, खाने में अखाद्य पदार्थ देना, अर्धनग्न अवस्था में जुलूस निकालना, जमीन पर कब्जा करना, मतदान से रोकना, छेड़छाड़, सामाजिक बहिष्कार, हत्या, बलात्कार और डकैती जैसे 47 प्रकार के अपराधों में सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जाती है।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल 2016 को शासन ने पेंशन राशि में वृद्धि की थी। वर्ष 2016 के बाद एट्रॉसिटी के जिन मामलों में मृत्यु हुई है, उनके वारिसों को प्रतिमाह 5 हजार रु., जबकि इससे पूर्व के मामलों में वारिसों को 3 हजार रु. मासिक पेंशन दी जाती है। गोंदिया जिले में वर्तमान में 2 मामलों में पेंशन दी जा रही है।
अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण (एट्रॉसिटी) अधिनियम के तहत जिले में दर्ज हत्या, आत्महत्या व मृत्यु के मामलों में पीड़ितों के वारिसों को प्रतिमाह 5 हजार रु. पेंशन देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके साथ ही वर्ष 1995 से 2011 तक के मामलों की जांच-पड़ताल सामाजिक न्याय विभाग और पुलिस विभाग की ओर से की जा रही है। इस कानून के तहत संबंधित व्यक्ति की हत्या होने पर उसके वारिसों को 8 लाख 25 हजार रु. की सहायता तीन चरणों में दी जाती है। इसमें अपराध दर्ज होने पर 25 प्रश, आरोपपत्र दाखिल होने पर 50 प्रश और मुकदमे का फैसला आने के बाद शेष 25 प्रश राशि दी जाती है।
गोंदिया समाज कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त किशोर भोयर ने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। 6 लाख 12 हजार 500 रु. की राशि से संबंधित दो प्रकरण प्रथम किस्त की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किए गए हैं। दो प्रकरणों में कोई व्यक्तिगत पीड़ित नहीं है, जबकि एक प्रकरण में आवश्यक दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए है। चालू वर्ष में 7 लाख 12 हजार 500 रु. की राशि के पांच प्रकरण द्वितीय किस्त की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किए गए हैं। वहीं, तीन प्रकरण पुलिस जांच के अधीन है।