प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
गोंदिया

बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ा बिल का बोझ, बिजली सस्ती होने की बजाय हो गई महंगी

Gondia News बिजली दरों में कमी के आदेश व वादों के बावजूद महाराष्ट्र में दरें बढ़ रही हैं। इससे उपभोक्ता नाराज़ हैं। महावितरण ने 5 साल में दरें घटाने का प्रस्ताव दिया था, पर उलटा असर दिख रहा है।

आकाश मसने

Electricity Bbecame Expensive in Maharashtra: महाराष्ट्र विद्युत विनियामक आयोग के जारी आदेश के अनुसार आने वाले दिनों में बिजली सस्ती होने के संकेत मिले थे। उसके अनुसार, मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी बिजली दर कम होने का वादा किया था। लेकिन राज्य में बिजली के दर कम होने की बजाय बढ़ रहे है। जिससे उपभोक्ताओं में आक्रोश निर्माण हो रहा है।

राज्य में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरें तय करने के लिए दायर महावितरण की याचिका पर महाराष्ट्र विद्युत विनियामक आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। आयोग ने अगले 5 वर्षों में सभी घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में कमी करने का आदेश दिया था।

महावितरण ऐसी पहली कंपनी है जिसने राज्य के इतिहास में बिजली दरों में कमी करने का प्रस्ताव पेश किया। इस आदेश की विशेषताओं में स्मार्ट मीटर वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए दिन के समय बिजली की खपत के लिए अतिरिक्त 10 प्रश। टीओडी छूट और सौर ऊर्जा उत्पन्न करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन शामिल है।

राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री बलिराजा (किसान) मुफ्त बिजली योजना' से राज्य में 7.5 एचपी तक के पंप वाले 45 लाख किसानों को पहले ही मुफ्त बिजली मिल रही है। इस योजना की क्षमता 16 हजार मेगावाट थी और इसके माध्यम से औसतन 3 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध होनी थी। यह योजना दिसंबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। महावितरण का कहना था कि 2025-26 में 10 प्रतिशत बिजली दर होंगे। लेकिन बिजली दर में वृद्धि देखी जा रहा है। जिससे उपभोक्ताओं में रोष निर्माण हो रहा है।

2030 तक महावितरण का प्लान

महावितरण ने संसाधन पर्याप्तता योजना तैयार की और राज्य की बिजली क्षमता को वर्ष 2030 तक 81,000 मेगावाट तक बढ़ाने के लिए 45,000 मेगावाट के बिजली खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें से 31,000 मेगावाट बिजली अक्षय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त की जाएगी। क्योंकि यह बिजली बहुत किफायती दर पर उपलब्ध होगी, इसलिए महावितरण को अगले 5 वर्षों में बिजली खरीद पर 66,000 करोड़ रुपए की बचत होगी।

उद्योग बंद होंगे व पलायन बढ़ेगा

गोंदिया राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सी अग्रवाल ने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि महाराष्ट्र में उद्योगों को बिजली दरें देश में सर्वाधिक है। उसे कम करने की मांग उद्योग कर रहे हैं जिससे हमारे राज्य के उद्योग अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा करने योग्य हो सके। बजाय इसके बिजली दरें बढ़ाई जा रही है। इससे राज्य में उद्योग बंद होंगे अथवा पलायन करेंगे। इस पर विचार किया जाना आवश्यक है तथा दरें कम करने की जरूरत है।

उद्योग जगत में व्याप्त

एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुमचंद अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए और बिजली दरों को कम करना चाहिए, विगत दिनों सरकार द्वारा घोषणा की गई थी कि विद्युत दरें कम होगी, इसमें उद्योग जगत के लिए संजीवनी माना जा रहा था, लेकिल बिजली दरों की वृद्धि से उद्योग जगत में निराशा व्याप्त है।

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