गोंदिया में आंदनवाड़ी केंद्र (सौजन्य-नवभारत) 
गोंदिया

प्रभारी के भरोसे बाल विकास प्रकल्प कार्यालय, 29 आंगनवाड़ियों में शौचालय, 74 में पानी की कमी

Gondia News: सड़क अर्जुनी तहसील के 108 गांवों में एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना प्रकल्प कार्यालय अंतर्गत आने वाली 189 आंगनवाड़ियों का कामकाज 31 जुलाई 2023 से प्रभारी के भरोसे चलता दिखाई दे रहा है।

प्रिया जैस

Gondia News: सड़क अर्जुनी तहसील के 108 गांवों में एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना प्रकल्प कार्यालय अंतर्गत आने वाली 189 आंगनवाड़ियों का कामकाज 31 जुलाई 2023 से प्रभारी के भरोसे चलता दिखाई दे रहा है। दो वर्ष पूर्व प्रकल्प अधिकारी मेंढ़े का तबादला लाखनी में हो जाने के बाद सड़क अर्जुनी तहसील के रिक्त स्थान पर कोई अन्य अधिकारी नहीं आया।

इससे एकात्मिक बाल विकास प्रकल्प सेवा योजना का जिम्मा एक विस्तार अधिकारी को सौंपा गया है। सड़क अर्जुनी तहसील में कुल 157 आंगनवाड़ी तथा 32 मिनी आंगनवाड़ियों समेत 189 आंगनवाड़ियां हैं। इन आंगनवाड़ियों में बच्चों को पोषक आहार देकर उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाता है। पंचायत समिति के विस्तार अधिकारी (सांख्यिकी) मनोहर दांडेकर प्रभारी बाल विकास प्रकल्प अधिकारी के रूप में कामकाज देख रहे हैं।

सात बीटों में आंगनवाड़ियां विभाजित

सड़क अर्जुनी तहसील में पांढ़री, डव्वा, चिखली, सौंदड़, शेंडा, सड़क अर्जुनी, कोसमतोंडी जैसी सात बीटों में आंगनवाड़ियों को विभाजित किया गया है। बीट के लाभार्थियों को योजना के लाभ के लिए महिला सुपरवाइजर की नियुक्ति की गई है। तहसील की आंगनवाड़ियों में 121 बचत समूहों के माध्यम से सरकार की ओर से 68 आंगनवाड़ियों में पोषक आहार वितरित किया जाता है। तहसील की 29 आंगनवाड़ियों में छोटे बच्चों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इसी प्रकार तहसील की 74 आंगनवाड़ियों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है।

98 आंगनवाड़ियों में बिजली नहीं

तहसील के 18 गांवों में सरकार की अलग इमारत नहीं होने की वजह से आंगनवाड़ी के बच्चों को कहीं भी बिठाकर पोषक आहार व पढ़ाई का काम किया जा रहा है। जबकि 98 आंगनवाड़ियों में बिजली नहीं है। जिससे गर्मी के मौसम में बच्चों को परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा भी आंगनवाड़ियों में कई प्रकार की समस्याएं बनी हुई हैं। एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना प्रकल्प में स्थायी अधिकारी की नियुक्ति की आवश्यकता है।

स्थायी अधिकारी नहीं होने से तहसील के कई गांवों में स्तनपान कराने वाली महिलाओं, बच्चों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आंगनवाड़ी की समस्याओं की ओर किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। तहसील के कई गांवों में आंगनवाड़ी सेविका द्वारा लाभार्थियों के साथ सही व्यवहार नहीं करने की भी स्थिति देखने मिल रही है।

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