Gadchiroli Tourism (सोर्सः सोशल मीडिया) 
गढचिरोली

प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध गड़चिरोली: 78% जंगल, कई पर्यटन स्थल, लेकिन विकास अब भी अधूरा

Gadchiroli Tourism: गड़चिरोली जिले में टिपागढ़ और बिनागुंडा जैसे अद्भुत पर्यटन स्थल बुनियादी सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। 78% वन क्षेत्र होने के बावजूद प्रशासन के पास विकास का रोडमैप नहीं।

रूपम सिंह

Gadchiroli News: राज्य के आखिरी छोर पर बसा गड़चिरोली जिला 78 फीसदी जंगल से व्याप्त है। विशेषत: इस जिले को कुदरती वरदान प्राप्त होकर यहां पर पर्यटन स्थलों की भरमार है।

किंतु सरकार और प्रशासन की उदासीनता के चलते अब तक जिले में एक भी पर्यटन स्थल का विकास नहीं हो पाया है। जिससे सभी पर्यटन स्थल उपेक्षा का शिकार बने हुए है। सरकार व प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान देकर पर्यटन स्थलों का विकास करने की मांग की जा रही है।

गड़चिरोली  जिले की उत्तरी छोर पर बसी कोरची तहसील के टिपागड़ पहाड़ी है। पहाड़ी के बीचों-बीच तालाब होकर तालाब में बारह माह पानी रहता है। विशेषत: पहाड़ी पर मंदिर होने के कारण महाराष्ट्र समेत छत्तीसगढ़ राज्य के पर्यटक भी यहां पर बड़े पैमाने पर आते है। किंतु पर्यटकों को सुविधा हो, इसलिए यहां पर किसी भी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गयी है। ऐसी ही स्थिति भामरागड़ तहसील के बिनागुंडा स्थित कुदरती झरने की है।

विकास अब भी अधूरा

यहां पर बारह माह बहने वाला झरना है। जिसके कारण भामरागड़ तहसील समेत भामरागड़ तहसील से सटे राज्य के पर्यटक इस झरने को देखने आते है। किंतु झरने तक पहुंचने के लिए प्रशासन द्वारा अब तक सड़क का निर्माण नहीं किया गया है।

आलापल्ली वनविभाग अंतर्गत आने वाले मिरकल के वनवैभव के विकास की ओर भी अनदेखी होने से इस पर्यटन स्थल की ओर पर्यटक जाना पसंद नहीं कर रहे है। इस जंगल में विभिन्न जाति के पौधे है। इसके अलावा चपराला अभारण्य भी अनदेखी का शिकार होने से पर्यटकों में नाराजगी व्यक्त की जा रही है।

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