नीति आयोग के सलाहकार दधिच इंद्रोदिया के दौरे के समापन पर आयोजित बैठक (सोर्स - फोटो नवभारत)  
गढचिरोली

गड़चिरोली देश के टॉप 10 आकांक्षी जिलों में शामिल, 28 हजार 'लखपति दीदी' को अब 'करोड़पति दीदी' बनाने का लक्ष्य

Gadchiroli Niti Aayog: गड़चिरोली जिला देश के 112 आकांक्षी जिलों में टॉप 10 में शामिल। 28 हजार लखपति दीदी को करोड़पति बनाने का लक्ष्य, पर भामरागड़ में कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती।

केतकी मोडक

Niti Aayog Aspirational District Gadchiroli: केंद्र सरकार की 'आकांक्षी जिला' (Aspirational Districts) पहल के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गड़चिरोली जिले ने देश के कुल 112 आकांक्षी जिलों में से शीर्ष 10 जिलों में स्थान प्राप्त किया है। प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव) निधि वितरण में जिले को यह महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

इस उपलब्धि को आगे भी कायम रखने के लिए सभी विभागों को केवल अल्पकालिक (शॉर्ट-टर्म) योजनाएं बनाने के बजाय भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दूरदृष्टिपूर्ण एवं नवाचार (इनोवेशन) आधारित विकास प्रस्ताव तैयार करने चाहिए। ऐसे निर्देश जिलाधिकारी अविश्यांत पांडा ने दिए।

नीति आयोग के सलाहकार दधिच इंद्रोदिया के गड़चिरोली जिला एवं आकांक्षी विकासखंडों—अहेरी, सिरोंचा और भामरागड़ के तीन दिवसीय दौरे के समापन पर आयोजित एक व्यापक समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने यह बात कही। इस बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुहास गाडे, सहायक जिलाधिकारी एम. अरुण, उपवनसंरक्षक आर्या तथा जिला नियोजन अधिकारी प्रसाद घाडगे प्रमुखता से उपस्थित थे। बैठक के दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे, जिला शल्य चिकित्सक डॉ. माधुरी किलनाके तथा जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी प्रीति हिरलकर ने अपने-अपने विभागों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।

'प्रोजेक्ट समन्वय' तथा 'महुआ नेट' पहल की शुरुआत

बैठक में जानकारी देते हुए उपवनसंरक्षक आर्या ने बताया कि 'प्रोजेक्ट समन्वय' के अंतर्गत जिले के 33 गांवों का विशेष रूप से चयन किया गया है। इस परियोजना के तहत महुआ के फूल संग्रह करने वाले स्थानीय आदिवासियों को महुआ की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 'महुआ नेट' (नेट कपड़ा) उपलब्ध कराए जाएंगे।

महिला सशक्तिकरण तथा कौशल विकास पर जोर

गड़चिरोली जिले में अब तक 28 हजार से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। प्रशासन द्वारा अब उन्हें और अधिक सशक्त बनाकर 'करोड़पति दीदी' बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही, सीएफआर (सामुदायिक वन अधिकार) क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं को लघु वनोपज प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, सब्जी की आधुनिक खेती तथा जलवायु अनुकूल (क्लाइमेट रेजिलिएंट) कृषि का विशेष प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है।

स्वास्थ्य तथा पोषण क्षेत्र की समीक्षा

नीति आयोग के सलाहकार दधिच इंद्रोदिया ने अपने दौरे के दौरान जिले के जिला अस्पताल, विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनवाड़ियों और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों का जमीनी निरीक्षण किया। समीक्षा बैठक में बताया गया कि जिले में संस्थागत प्रसव (अस्पताल में डिलीवरी) का आंकड़ा 95 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है, जो कि एक सराहनीय उपलब्धि है।

हालांकि, भामरागड़ जैसे अत्यंत दूरस्थ क्षेत्रों में अब भी 60 से 70 प्रतिशत बच्चे जन्म के समय कम वजन के पाए जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। निरीक्षण के दौरान आंगनवाड़ियों की आधारभूत सुविधाएं तथा 'अमृत आहार' योजना का क्रियान्वयन संतोषजनक पाया गया। हालांकि, गर्भवती महिलाओं को वितरित की जाने वाली 'रेडी टू कुक' मूंग दाल खिचड़ी की गुणवत्ता को लेकर कुछ शिकायतें सामने आई हैं, जिन्हें जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

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