जयराम के परिवार से की भेंट (सौजन्य-नवभारत) 
गढचिरोली

महाराष्ट्र में बचा केवल 1 नक्सली, जानें गड़चिरोली के आखिरी नक्सली जयराम गावडे की कहानी, कैसे बना माओवादी

Gadchiroli Naxalite Surrender: गड़चिरोली में नक्सलवाद का अंत! जिले का आखिरी स्थानीय नक्सली जयराम गावडे। पिता और वामपंथी दलों ने की हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने की भावुक अपील।

प्रिया जैस

Last Naxalite Maharashtra: देश के गृह विभाग द्वारा 31 मार्च नक्सलियों के लिए आखिरी अल्टीमेटम की तारीख निर्धारित की गई थी। इसी बीच 31 मार्च को छत्तीसगढ़ के 9 नक्सलियों ने गड़चिरोली जिला पुलिस दल के सामने आत्मसमर्पण किया। वहीं दूसरी ओर इसी दिन वामपंथी दलों के पदाधिकारी जिले में बचे एकमात्र नक्सली जयराम गावडे के गांव पहुंचकर उसके परिजनों से चर्चा की।

साथ ही जयराम से आत्मसमर्पण कर लोकतांत्रिक मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की। संपूर्ण देश में नक्सल आंदोलन को समाप्त करने के उद्देश्य से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च को अंतिम तिथि घोषित की थी। इसके तहत मंगलवार को छत्तीसगढ़ राज्य के 9 नक्सलियों ने हथियारों सहित गड़चिरोली जिला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

इससे गड़चिरोली में नक्सल आंदोलन के अंत की शुरुआत मानी जा रही है। वर्तमान स्थिति में गड़चिरोली जिले में केवल 6 सशस्त्र नक्सली शेष हैं, जिनमें से जयराम गावडे ही एकमात्र गड़चिरोली जिले का निवासी नक्सली है, जबकि अन्य पांच नक्सली छत्तीसगढ़ राज्य के हैं। यह जानकारी जिला पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल ने दी।

जयराम के परिवार से की भेंट

एक ओर 31 मार्च को जिला पुलिस दल द्वारा नक्सलियों का आत्मसमर्पण कराया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर शेतकरी कामगार पार्टी के नेता रामदास जराते, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव अमोल मारकारवार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सहसचिव सचिन मोतकुरवार और सुरज जक्कुलवार एटापल्ली क्षेत्र के दौरे पर थे। उन्होंने जिले के एकमात्र नक्सली जयराम उर्फ नंदू मोंगे गावडे के गिलनगुडा गांव पहुंचकर उसके परिजनों से भेंट की। जहां जयराम के पिता मोंगे गावडे से चर्चा कर जयराम से हथियार छोड़कर लोकतांत्रिक मार्ग अपनाने की अपील की गई।

लोकतांत्रिक मार्ग से जनता के कार्य करने वालों का स्वागत

भाकपा, शेकाप और माकपा जैसे वामपंथी दल आज भी आम जनता के लिए संसद, विधिमंडल और सड़क पर निरंतर संघर्ष कर रहे हैं और करोड़ों लोगों को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने का कार्य किया है। रोजगार गारंटी, पेसा और वनाधिकार जैसे जनहित के कानून वामपंथी दलों द्वारा लोकतांत्रिक मार्ग से किए गए संघर्ष का परिणाम हैं। देश में बंदूक के बल पर जनता का विकास होना केवल भ्रम साबित हुआ है।

इसलिए शेष नक्सलियों से अपील की गई है कि वे हथियार त्यागकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल हों और वामपंथी दलों के नेतृत्व में संसद, विधिमंडल और सड़क पर संघर्ष करें। लोकतांत्रिक मार्ग से जनता के लिए कार्य करने के इच्छुक आत्मसमर्पितों का पार्टी में स्वागत किया जाएगा। यह बात रामदास जराते, अमोल मारकारवार, सचिन मोतकुरवार और सुरज जक्कुलवार ने कही।

जयराम, घर वापस लौट आ: पिता मोंगे गावडे की अपील

घरेलू कार्य को लेकर नाराज होकर नंदू घर छोड़कर चला गया था और नक्सल आंदोलन में शामिल हो गया। तब से वह कभी घर नहीं लौटा। अब नक्सलियों के अधिकांश बड़े नेता दलम छोड़ चुके हैं। ऐसी स्थिति में जंगल में रहने के बजाय नक्सल आंदोलन छोड़कर नंदू घर वापस लौट आए, ऐसी भावनात्मक अपील जयराम उर्फ नंदू के पिता मोंगे गावडे ने की है।

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